Shukra Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत हर महीने के दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इसे विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है. प्रदोष काल में की गई पूजा से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है.
सितंबर 2025 में पहला प्रदोष व्रत कब है?प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे सही समय सूर्यास्त के बाद का माना गया है, जिसे प्रदोष काल कहते हैं. इस दौरान शिव-पार्वती की आराधना करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है.
प्रदोष व्रत की पूजा विधिव्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान करके शिवजी का संकल्प लें. पूरे दिन व्रती फलाहार या निर्जला उपवास कर सकते हैं. संध्या समय प्रदोष काल में भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें. शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें.ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें. सबसे आखिर में आरती कर परिवार की मंगलकामना करें.
प्रदोष व्रत के अचूक लाभDisclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.