जिले के खमनोर ब्लॉक मुख्यालय और सेमा ग्राम पंचायत में किसानों की हालत इन दिनों बेहद दयनीय है। मौसम और बारिश की मार तो वे वर्षों से सहते आए हैं, लेकिन इस बार उनकी मुसीबत का नाम है – सूअरों का आतंक। खेतों में दिन-रात मेहनत कर बोई गई मक्का, ज्वार, गन्ना और अन्य खरीफ फसलें अब सूअरों के झुंडों का शिकार बन रही हैं।
किसानों ने बताया कि सूअरों के झुंड खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। कहीं पौधों को खाया जा रहा है, तो कहीं उन्हें रौंदकर मिट्टी में मिला दिया जा रहा है। इस वजह से किसानों को अपनी फसल की लागत भी निकालने में मुश्किल हो रही है। कई किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और अब उन्हें चिंता है कि इस बार फसल नुकसान के कारण उनकी सालभर की मेहनत व्यर्थ जा सकती है।
स्थानीय किसान रामसिंह ने बताया, “हमने पूरे साल मेहनत करके फसल बोई थी। लेकिन अब सूअरों ने हमारा सारा श्रम बर्बाद कर दिया। रात-दिन खेतों में चेक करने के बाद भी कई बार देर हो जाती है। हमारी हालत इतनी खराब हो गई है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।”
कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि सूअरों का आतंक राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर डालता है, बल्कि खेती की सामान्य गतिविधियों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर खेतों की सुरक्षा और नुकसान रोकने के लिए उपाय करें।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में सूअरों की संख्या बढ़ने के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में सुरक्षात्मक उपाय करें, जैसे कि खेतों के चारों ओर कंटीली तार या सुरक्षा गार्ड लगाना। इसके अलावा, विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों की सूचना तुरंत वन अधिकारियों को दें ताकि उचित कदम उठाए जा सकें।
स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति का संज्ञान लिया है। खमनोर और सेमा पंचायत क्षेत्र के अधिकारियों ने किसानों से कहा है कि वे नुकसान का ब्यौरा तैयार करें। साथ ही, किसानों को आश्वासन दिया गया है कि वन विभाग के सहयोग से सूअरों के नियंत्रण और फसल सुरक्षा के लिए जल्द ही योजना बनाई जाएगी।
किसानों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो सूअरों का आतंक और अधिक बढ़ सकता है। वे चाहते हैं कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करें ताकि उनकी मेहनत और फसल बचाई जा सके।
यह स्थिति दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में फसलों को केवल मौसम और बारिश से ही खतरा नहीं है, बल्कि वन्य जीवों का हमला भी किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। इस समय किसानों को प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय समुदाय के सहयोग की सख्त आवश्यकता है।
सिरोही के खमनोर और सेमा ब्लॉक के किसानों के लिए यह दौर बेहद कठिन साबित हो रहा है। उनके लिए अब प्राथमिकता फसल की सुरक्षा और आर्थिक नुकसान को रोकना है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में खेती और किसानों की स्थिति और बिगड़ सकती है।