हम सभी अपने जीवन में स्थिरता और आराम की खोज में रहते हैं। यह स्वाभाविक है कि इंसान ऐसे माहौल में रहना चाहता है जहाँ उसे किसी प्रकार का जोखिम न उठाना पड़े और सब कुछ सहज लगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह कम्फर्ट जोन आपकी सफलता के लिए सबसे बड़ा बाधक बन सकता है? यदि आप इससे बाहर नहीं निकलते, तो आप जीवनभर एक ही स्थान पर ठहरे रह जाएंगे। इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन्होंने अपने आरामदायक माहौल को तोड़ा, वही लोग आगे बढ़े और नई ऊँचाइयों को छुआ।
कम्फर्ट जोन में रहना शुरू में सुखद लगता है। यहाँ न कोई चुनौती होती है, न कोई दबाव और न ही असफलता का डर। लेकिन यहीं से ठहराव शुरू होता है। जब कोई व्यक्ति नई चुनौतियों का सामना करना बंद कर देता है, तो उसकी क्षमताएँ और सोचने की शक्ति धीरे-धीरे सीमित हो जाती हैं। यह ऐसा है जैसे कोई मछली एक छोटे तालाब में रह जाए और समुद्र में जाने का साहस न करे। बाहर निकले बिना बड़े मौके, नई संभावनाएँ और असली सफलता कभी नहीं मिल सकती।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने हमेशा युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाइयों से भागना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें गले लगाना चाहिए। उनका कहना था, "महान सपने देखने वाले ही महान बनते हैं।" कलाम साहब का जीवन इस बात का प्रमाण है। साधारण परिवार से निकलकर मिसाइल मैन और राष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था। उन्होंने कई असफलताओं का सामना किया, लेकिन हर बार अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर नई उपलब्धियाँ हासिल कीं।
जब हम कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं, तो वही हमें मजबूत बनाती हैं। आसान रास्तों से कभी भी गहरी सीख नहीं मिलती। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र केवल वही सवाल पढ़ता है जो उसे आते हैं, तो परीक्षा में नए सवाल देखकर घबरा जाएगा। लेकिन यदि वह चुनौतीपूर्ण प्रश्नों को हल करने की कोशिश करेगा, तो असफल होने के बावजूद उसका दिमाग और मजबूत होगा। यही जीवन पर भी लागू होता है। जितना अधिक आप कठिनाइयों का सामना करेंगे, उतना ही जीवन आपको निखारेगा।
दुनिया में जितने भी सफल लोग हुए हैं, उनकी कहानियों में एक बात कॉमन है – उन्होंने अपने कम्फर्ट जोन से बाहर कदम रखा।
स्टीव जॉब्स ने कॉलेज छोड़कर अपनी रुचि के अनुसार काम करना शुरू किया और जोखिम उठाकर Apple जैसी कंपनी की नींव रखी।
धीरूभाई अंबानी ने पेट्रोल पंप पर काम करने से लेकर उद्योगपति बनने तक का सफर तय किया क्योंकि उन्होंने स्थिर जीवन से समझौता नहीं किया।
मेरी कॉम ने महिला बॉक्सिंग जैसे कठिन खेल में समाज की धारणाओं को तोड़ा और खुद को साबित किया।
इन सभी ने दिखा दिया कि अगर आप असफलता के डर में कम्फर्ट जोन में रहेंगे तो आप कभी असली ऊँचाई नहीं छू पाएंगे।
छोटे-छोटे कदम उठाएँ: अचानक बड़े बदलाव की बजाय धीरे-धीरे नई आदतें अपनाएँ।
असफलता को स्वीकार करें: हार को सीख समझें, न कि रुकने का कारण।
नई स्किल सीखें: हर दिन कुछ नया सीखने की आदत डालें।
जोखिम लें: बिना जोखिम लिए कुछ बड़ा हासिल नहीं होता।
पॉजिटिव लोगों से जुड़ें: प्रेरणादायक माहौल ही आपको आगे बढ़ने का हौसला देगा।