केंद्र सरकार ने संकट में फंसी वोडाफोन आइडिया को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। केंद्रीय कैबिनेट की हालिया बैठक में कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाए को पांच वर्षों के लिए फ्रीज करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के तहत लगभग 87,695 करोड़ रुपये की देनदारी पर फिलहाल कोई भुगतान नहीं करना होगा।
हालांकि, यह राहत पूरी तरह से बिना शर्त नहीं है। सरकार द्वारा जारी किए गए नोट में स्पष्ट किया गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से संबंधित AGR बकाए, जिनका भुगतान सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही निर्धारित किया गया है, को वोडाफोन आइडिया को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच चुकाना होगा।
यह निर्णय वोडाफोन आइडिया की हालिया अपील के बाद लिया गया है, जिसमें कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत राहत की मांग की थी। सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करते हुए बाकी बकाए को 2031-32 से 2040-41 के बीच पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक फ्रीज किए गए AGR बकाए की समीक्षा दूरसंचार विभाग द्वारा की जाएगी। यह प्रक्रिया 3 फरवरी 2020 की डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइंस और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर होगी। इसके बाद एक सरकारी समिति अंतिम निर्णय लेगी, जो दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र सरकार पहले से ही वोडाफोन आइडिया में लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल अपने निवेश की सुरक्षा करेगा, बल्कि टेलीकॉम क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और करोड़ों उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि टेलीकॉम क्षेत्र एक रणनीतिक क्षेत्र है और इसमें सीमित खिलाड़ियों का होना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए वोडाफोन आइडिया को संचालन में बनाए रखना और उसके वित्तीय बोझ को संतुलित करना दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।