चाणक्य नीति: पति की इच्छाओं का सम्मान करें, सुखी विवाह का रहस्य
Gyanhigyan January 03, 2026 02:44 AM
सुखी विवाह का महत्व

एक सफल और खुशहाल विवाह के लिए पति-पत्नी दोनों का खुश रहना आवश्यक है। यदि पति दुखी होता है, तो पत्नी भी प्रभावित होती है। इसी तरह, जब पति खुश होता है, तो पत्नी का चेहरा भी मुस्कुराता है।


पत्नी के दुखी होने पर पति का कर्तव्य है कि वह उसे सहारा दे और उसके दुख को दूर करने का प्रयास करे। इसी प्रकार, जब पति दुखी होता है, तो पत्नी को उसकी भावनाओं को समझने और उसे खुश करने का प्रयास करना चाहिए। यदि पति किसी चीज की मांग करता है, तो पत्नी का कर्तव्य है कि वह उसे बिना किसी संकोच के प्रदान करे।


आचार्य चाणक्य ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए हैं। वे एक महान विद्वान थे, जिन्होंने जीवन प्रबंधन के लिए उपयोगी टिप्स दिए हैं। ये टिप्स आज भी प्रासंगिक हैं और यदि अपनाए जाएं, तो व्यक्ति को सुखी जीवन जीने में मदद मिलती है।


चाणक्य के अनुसार, एक सफल विवाह के लिए पति-पत्नी के बीच प्रेम होना अनिवार्य है। यदि प्रेम की कमी होती है, तो परिवार बिखर जाता है। लेकिन जब प्रेम होता है, तो संबंध मजबूत होते हैं। यदि पति उदास है, तो पत्नी को उसकी इच्छाओं को समझने का प्रयास करना चाहिए।


जब घर में खुशियों की कमी होती है, तो पुरुष बाहर की ओर देखने लगते हैं। कोई भी पत्नी ऐसी स्थिति नहीं चाहती। इसलिए, यह आवश्यक है कि पत्नी अपने पति को वह प्रेम दे, जिसकी उसे आवश्यकता है। पति का प्यार पाना उसका अधिकार है, और पत्नी को इस पर गर्व होना चाहिए।


यदि पत्नी अपने पति को खुश रखती है, तो घर में दुख का प्रवेश नहीं होगा। प्रेम से झगड़े भी समाप्त हो जाते हैं और संबंध मजबूत होते हैं। इसलिए, जब पति प्रेम की इच्छा व्यक्त करे, तो उसे निराश न करें और उसकी इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास करें।


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