भारत बनेगा ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब, 41,863 करोड़ का होगा निवेश; 33,791 लोगों को मिलेंगी नौकरियां
TV9 Bharatvarsh January 04, 2026 01:42 AM

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है. केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं से देश में करीब 41,863 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और 33,791 नए रोजगार पैदा होंगे. यह फैसला भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

इन नई परियोजनाओं का मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है. सरकार का फोकस अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी पर है. इससे देश में मोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर जैसे सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा.

आठ राज्यों में फैलेंगी परियोजनाएं

स्वीकृत परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में लगेंगी. इसका फायदा यह होगा कि औद्योगिक विकास केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में रोजगार और निवेश के नए अवसर बनेंगे. सरकार का यह कदम संतुलित औद्योगिक विकास को भी दर्शाता है.

एपल सप्लाई चेन से जुड़े वेंडर करेंगे बड़ा निवेश

भारत में एपल की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने के साथ-साथ उसके सप्लाई चेन वेंडर्स भी भारी निवेश कर रहे हैं. इनमें कई कंपनियां ऐसी हैं जो भविष्य में भारत से ही अपने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्यात करेंगी. इससे भारत की पहचान केवल एक मैन्युफैक्चरिंग हब ही नहीं, बल्कि ग्लोबल एक्सपोर्ट सेंटर के रूप में भी मजबूत होगी.

किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा पैसा लगेगा

इस चरण में सबसे ज्यादा निवेश मोबाइल और डिवाइस एनक्लोजर यानी बाहरी ढांचे बनाने वाली इकाइयों में होगा. केवल इसी सेगमेंट में हजारों करोड़ रुपये लगाए जाएंगे. इसके अलावा प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), लिथियम-आयन बैटरी सेल, कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे अहम कंपोनेंट्स पर भी जोर रहेगा. ये सभी चीजें स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में बेहद जरूरी होती हैं.

सरकार का फोकस

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा है कि सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके तेज और प्रभावी क्रियान्वयन पर भी पूरा ध्यान दे रही है. उन्होंने कंपनियों को डिजाइन इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने की सलाह दी ताकि भारतीय उत्पाद ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धी बन सकें.

बड़ी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी

इन परियोजनाओं में फॉक्सकॉन, सैमसंग, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और हिंडाल्को जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. अकेले तमिलनाडु में फॉक्सकॉन की एक परियोजना से 16 हजार से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है. इससे साफ है कि यह निवेश सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों की जिंदगी बदलने वाला है.

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