EPFO Salary Limit Hike News: अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं, तो आपने गौर किया होगा कि पिछले 10 सालों में दूध के दाम से लेकर घर के किराए तक सब कुछ दोगुना हो गया है। लेकिन आपकी सामाजिक सुरक्षा यानी PF (Provident Fund) से जुड़ा एक नियम 11 सालों से पत्थर की लकीर बना हुआ है। अब इस सुस्त पड़ी व्यवस्था को जगाने के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने मोर्चा संभाल लिया है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब लाखों कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद जाग गई है।
महंगाई के दौर में 15 हजार की लिमिट पर कोर्ट का प्रहारसुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार से एक चुभता हुआ सवाल पूछा है। कोर्ट ने कहा कि जब देश में महंगाई सातवें आसमान पर है और हर राज्य में न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) बढ़ चुका है, तो ईपीएफओ (EPFO) की सैलरी लिमिट अभी भी 15,000 रुपये पर क्यों टिकी है? जस्टिस ने साफ लहजे में सरकार को निर्देश दिया है कि इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाएं और अगले चार महीनों के भीतर एक ठोस फैसला लें। कोर्ट का मानना है कि 11 साल तक नियमों में कोई बदलाव न करना कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी है।
2014 के बाद से नहीं बदला नियम, आखिर क्यों?आपको बता दें कि आखिरी बार साल 2014 में ईपीएफओ की वेज सीलिंग (सैलरी लिमिट) बदली गई थी। तब इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। आज हम 2026 की दहलीज पर खड़े हैं, लेकिन नियम वही पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि कई राज्यों में तो अब सफाई कर्मचारी या मजदूर का न्यूनतम वेतन भी 15,000 रुपये से ज्यादा है। ऐसे में यह नियम कर्मचारियों को फायदा पहुंचाने के बजाय उन्हें ईपीएफओ के दायरे से बाहर धकेल रहा है।
फाइल तो तैयार है, बस हरी झंडी की है देरीहैरानी की बात यह है कि सरकार और ईपीएफओ खुद भी जानते हैं कि यह लिमिट बढ़नी चाहिए। साल 2022 में ही ईपीएफओ की एक कमेटी ने सैलरी लिमिट बढ़ाने का सुझाव दिया था और सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने भी इस पर अपनी रजामंदी दे दी थी। लेकिन फाइल दफ्तरों के चक्कर काटती रही। अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वे दो हफ्ते में सरकार को एक प्रेजेंटेशन दें, जिसके बाद सरकार को तय समय के अंदर अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा। यानी अब यह मामला ‘फास्ट ट्रैक’ पर आ गया है।
अगर सीमा बढ़ी तो आपकी जेब पर क्या होगा असर?सूत्रों की मानें तो सरकार इस लिमिट को 15,000 से बढ़ाकर 21,000 या सीधे 25,000 रुपये कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो आपकी पेंशन की रकम में भारी इजाफा होगा। वर्तमान में पेंशन स्कीम (EPS) में योगदान केवल 15,000 रुपये की लिमिट पर ही कैलकुलेट होता है। अगर लिमिट 25,000 रुपये हो जाती है, तो आपके पेंशन फंड में हर महीने जमा होने वाली राशि 1,250 रुपये से बढ़कर सीधे 2,083 रुपये तक पहुंच जाएगी। यानी साल भर में आपके रिटायरमेंट फंड में लगभग 10,000 रुपये का एक्स्ट्रा फायदा होगा। हालांकि, इससे कंपनियों का खर्च बढ़ेगा, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह ‘बुढ़ापे की लाठी’ को और मजबूत करने वाला फैसला साबित होगा।