हड़बड़ाने की जरुरत नहीं, जानिये बैंक नियमों का वह सच जो क्रेडिट कार्ड होल्डर की मृत्यु के बाद लागू होते हैं
Newsindialive Hindi January 09, 2026 01:42 AM

News India Live, Digital Desk: हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ क्रेडिट कार्ड हमारी जेब का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। लेकिन वित्तीय जानकारी के अभाव में कई लोग यह मान लेते हैं कि किसी की मृत्यु के बाद उसके सारे कर्ज अपने आप खत्म हो जाते हैं, या फिर यह कि घर के सदस्यों को अपनी जेब से वह पैसा भरना होगा। सच तो यह है कि हकीकत इन दोनों बातों के बीच कहीं छिपी है।आइए इसे बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि क्रेडिट कार्ड बिल को लेकर बैंक और कानून के नियम क्या कहते हैं।1. क्या कानूनी वारिस (Heir) जिम्मेदार है?भारतीय कानून के हिसाब से, अगर आपने क्रेडिट कार्ड के किसी आवेदन पर 'को-बॉरोअर' (Co-borrower) या 'गारंटर' के तौर पर साइन नहीं किए हैं, तो आप व्यक्तिगत रूप से उस कर्ज को चुकाने के लिए बाध्य नहीं हैं। मतलब, बैंक आपको मजबूर नहीं कर सकता कि आप अपनी खुद की कमाई या सेविंग्स से वह बिल भरें।2. बैंक वसूली कहाँ से करेगा?भले ही परिवार को अपनी जेब से पैसा न देना पड़े, लेकिन बैंक अपने नुकसान की भरपाई मृतक की'एस्टेट' (Estate) से करने का पूरा हक रखता है। 'एस्टेट' का मतलब है उस व्यक्ति की छोड़ी गई जायदाद, बैंक बैलेंस, शेयर, या अन्य संपत्तियां। यदि उस व्यक्ति के नाम पर कोई घर या जमीन है, तो बैंक कोर्ट के जरिए उससे अपना बकाया वसूलने का दावा कर सकता है।3. क्या नॉमिनी (Nominee) का कोई रोल है?अक्सर लोग समझते हैं कि नॉमिनी बनने का मतलब सिर्फ पैसा मिलना है। लेकिन नियम ये है कि अगर किसी व्यक्ति ने अपने बैंक खाते में आपको नॉमिनी बनाया है, तो आप उस पैसे के मालिक नहीं बल्कि 'कस्टोडियन' (रखवाले) हैं। बैंक पहले अपने कर्ज की वसूली उस पैसे से करेगा, और जो बचेगा वही परिवार को मिलेगा।4. जब कोई संपत्ति ही न हो, तब क्या होगा?अगर क्रेडिट कार्ड होल्डर के पास कोई भी चल या अचल संपत्ति नहीं थी, तो ऐसी स्थिति में बैंक को वह नुकसान खुद झेलना पड़ता है। बैंक इस पैसे को 'NPA' (बैड डेट) घोषित करके बट्टे खाते में डाल देता है। ऐसी स्थिति में परिवार पर कोई कानूनी दबाव नहीं बनाया जा सकता।5. ऐड-ऑन कार्ड और जॉइंट अकाउंट की चेतावनीयदि आपके पास 'ऐड-ऑन' (Add-on) कार्ड था, तो स्थिति थोड़ी अलग हो सकती है। मुख्य कार्ड होल्डर की मृत्यु के बाद अगर कोई उस कार्ड का इस्तेमाल करता है, तो इसे फ्रॉड माना जाता है और बैंक बाकी राशि की वसूली आपसे कर सकता है। इसलिए ऐसी स्थिति में तुरंत बैंक को जानकारी देना और कार्ड बंद करना सबसे बुद्धिमानी है।क्या क्रेडिट इंश्योरेंस मददगार है?आजकल कई बैंक क्रेडिट कार्ड के साथ एक सुरक्षा बीमा (Credit Insurance) भी देते हैं। अगर कार्ड होल्डर की मौत हो जाए, तो बीमा कंपनी उस कर्ज को चुकता कर देती है। एक बार आपको यह जरूर चेक करना चाहिए कि आपके या आपके परिजन के कार्ड पर यह सुविधा थी या नहीं।

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