हाईवे पर नहीं टूटेगी कॉल, खराब नेटवर्क से छुटकारा दिलाएगा नया प्लान
Navyug Sandesh Hindi January 09, 2026 01:42 AM

हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए अक्सर सबसे बड़ी परेशानी होती है खराब मोबाइल नेटवर्क। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान कॉल का बार-बार कटना, इंटरनेट का अचानक बंद हो जाना और “हेल्लो-हेल्लो” की आवाजें आम अनुभव बन चुकी हैं। अब इस समस्या से राहत दिलाने के लिए हाईवे कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने की दिशा में एक नया और ठोस प्लान तैयार किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना का मकसद राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर निर्बाध मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इसके तहत हाईवे के दोनों ओर तय दूरी पर मोबाइल टावर, स्मॉल सेल टेक्नोलॉजी और फाइबर नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा, ताकि चलते वाहन में भी नेटवर्क कमजोर न पड़े।

क्यों जरूरी था यह प्लान

देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। रोजाना लाखों लोग निजी वाहनों, बसों और ट्रकों से लंबी दूरी तय करते हैं। ऐसे में खराब नेटवर्क न सिर्फ असुविधा पैदा करता है, बल्कि आपात स्थिति में खतरा भी बन सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मजबूत कनेक्टिविटी से सड़क सुरक्षा, नेविगेशन और इमरजेंसी सेवाओं में बड़ा सुधार होगा।

कैसे काम करेगा नया कनेक्टिविटी मॉडल

इस प्लान के तहत हाईवे को छोटे-छोटे सेक्शन में बांटा जाएगा। हर सेक्शन में नेटवर्क कवरेज की जांच कर वहां जरूरत के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर लगाया जाएगा। खास बात यह है कि 5G रेडी नेटवर्क को ध्यान में रखकर यह ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में तकनीक बदलने पर दोबारा काम न करना पड़े।

इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों और जंगलों से गुजरने वाले हाईवे पर सैटेलाइट और माइक्रोवेव लिंक का भी इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि भौगोलिक बाधाओं के बावजूद नेटवर्क बना रहे।

यात्रियों और कारोबार दोनों को फायदा

इस योजना से आम यात्रियों को तो सुविधा मिलेगी ही, साथ ही लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी बड़ा फायदा होगा। ट्रक ड्राइवरों को रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल पेमेंट और नेविगेशन में आसानी होगी। ई-कॉमर्स और कैब सर्विसेज के लिए भी यह कनेक्टिविटी गेम चेंजर साबित हो सकती है।

कब तक दिखेगा असर

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्लान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर किया जाएगा, उसके बाद राज्य और ग्रामीण हाईवे तक इसका विस्तार होगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ वर्षों में हाईवे पर नेटवर्क की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

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