महाशिवरात्रि 2026: कब रखा जाएगा व्रत, जानें सही तारीख, पूजा का शुभ समय और व्रत नियम
JournalIndia Hindi January 09, 2026 01:42 PM

Mahashivratri 2026: तारीख, निशिता काल पूजा, चार प्रहर का समय और महत्व

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि के दिन देश-विदेश में करोड़ों शिव भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं। यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

आइए जानते हैं महाशिवरात्रि 2026 की सही तारीख, निशिता काल पूजा का समय, चार प्रहर पूजा मुहूर्त और इस व्रत का धार्मिक महत्व।

महाशिवरात्रि 2026 की तारीख

वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी।

पंचांग के अनुसार:

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 5:04 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 5:34 बजे

निशिता काल में पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है, इसलिए व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा।

निशिता काल पूजा मुहूर्त
  • निशिता काल:
    रात 11:55 बजे से 12:56 बजे तक

इस समय शिवलिंग का अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा समय
  • प्रथम प्रहर:
    15 फरवरी – शाम 6:11 से 9:23 बजे तक
  • द्वितीय प्रहर:
    15 फरवरी – रात 9:23 से 12:36 बजे तक
  • तृतीय प्रहर:
    15–16 फरवरी – रात 12:36 से सुबह 3:47 बजे तक
  • चतुर्थ प्रहर:
    16 फरवरी – सुबह 3:47 से 6:59 बजे तक

चारों प्रहर में पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

महाशिवरात्रि व्रत पारण समय
  • 16 फरवरी 2026 – सुबह 6:42 से दोपहर 3:10 बजे तक
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • इस रात भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था
  • इसी दिन शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ
  • व्रत रखने से पापों का नाश होता है

महाशिवरात्रि का व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख, मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

महाशिवरात्रि 2026 शिव भक्तों के लिए भक्ति और साधना का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। किसी भी धार्मिक कार्य से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

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