वायु प्रदूषण पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश बोले- एनसीएपी कागजी बनकर रह गया
Indias News Hindi January 12, 2026 10:42 AM

New Delhi, 11 जनवरी . कांग्रेस पार्टी ने वायु प्रदूषण के मुद्दे को लेकर केंद्र Government पर निशाना साधा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) अब ‘नोशनल’ क्लीन एयर प्रोग्राम यानी कागजी बनकर रह गया है.

जयराम रमेश ने Sunday को एक बयान में कहा, “सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक नए विश्लेषण ने उस सच्चाई की पुष्टि की है, जो लंबे समय से India का सबसे खुला रहस्य है कि वायु गुणवत्ता पूरे देश में एक संरचनात्मक संकट है और इस पर Government की प्रतिक्रिया बेहद अप्रभावी और अपर्याप्त है. सैटेलाइट डेटा के आधार पर किए गए इस अध्ययन में सामने आया है कि India के लगभग 44 प्रतिशत शहर (आकलन किए गए 4,041 नगरों में से 1,787 शहर) लगातार वायु प्रदूषण की गंभीर चपेट में हैं. इन शहरों में पांच सालों के दौरान हवा में वार्षिक PM2.5 का स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर बना रहा है.”

उन्होंने कहा कि जिस एनसीएपी को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, वह वास्तव में एक अलग ही किस्म का एनसीएपी (नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) बन गया है. अब इसकी गहन समीक्षा, व्यापक सुधार और पुनर्गठन की सख्त जरूरत है.

जयराम रमेश ने कहा, “पहला कदम यह स्वीकार करना होना चाहिए कि India के बड़े हिस्सों में वायु प्रदूषण से जुड़ा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट मौजूद है. इसी संकट को ध्यान में रखते हुए अब एयर पॉल्यूशन (कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) एक्ट, 1981 और नवंबर 2009 में लागू किए गए नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (एनएएक्यूएस) की पूरी तरह से पुनर्समीक्षा और व्यापक सुधार किया जाना जरूरी है.”

कांग्रेस सांसद ने अपने बयान में कहा कि Government को एनसीएपी के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले फंड में बड़े पैमाने पर वृद्धि करनी होगी. उन्होंने कहा, “एनसीएपी को 25 हजार करोड़ रुपए का कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए और इसे देश के सबसे अधिक प्रदूषित 1,000 शहरों और कस्बों तक विस्तारित किया जाना चाहिए.”

उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएपी को अपने प्रदर्शन का पैमाना पीएम 2.5 के स्तर को बनाना चाहिए. जयराम रमेश ने कहा कि एनसीएपी को कानूनी आधार देने के साथ-साथ इसे अपने ध्यान को प्रमुख प्रदूषण स्रोतों पर केंद्रित करना चाहिए.

जयराम रमेश ने मांग उठाई कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए तय वायु प्रदूषण मानकों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए. सभी बिजली संयंत्रों में वर्ष 2026 के अंत तक फ्लू गैस डी-सलफराइजर (एफजीडी) अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाने चाहिए. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की स्वतंत्रता को बहाल किया जाना चाहिए और पिछले 10 सालों में किए गए जन-विरोधी पर्यावरण कानूनों के संशोधनों को वापस लिया जाना चाहिए.

कांग्रेस सांसद ने Government पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक संसद में दो बार (पहली बार 29 जुलाई 2024 को और दूसरी बार 9 दिसंबर 2025 को) Government ने वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की है. Government सच से अनजान नहीं है, बल्कि वह अपनी अक्षमता और लापरवाही के पैमाने को छिपाने का प्रयास कर रही है.

डीसीएच/

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