
Ahmedabad, 12 जनवरी . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Monday को राजकोट में वाइब्रेंट रिजनल 2026 कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने वाइब्रेंट 2026 के तहत लगे ड्रोन तकनीक की समीक्षा की और देश की विकास यात्रा को लेकर केंद्र Government की उपलब्धियों के बारे में बताया.
Union Minister ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में Gujarat में वाइब्रेंट जैसे वैश्विक मंचों का आयोजन किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य देश और विदेश से निवेश आकर्षित करना है. इससे न केवल उद्योगों को मजबूती मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे. उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट Gujarat पहल ने बीते वर्षों में राज्य को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है.
राजकोट वाइब्रेंट 2026 समिट के दौरान आयोजित काइट फेस्टिवल का भी उल्लेख करते हुए मंत्री ने भारत-जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने की संभावनाओं पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि Ahmedabad में चल रहे काइट फेस्टिवल में जर्मन चांसलर की Prime Minister Narendra Modi के साथ मौजूदगी India की वैश्विक साख को दर्शाती है. यह पहल देश के आर्थिक और कूटनीतिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में Gujarat के सौर ऊर्जा मॉडल का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी है. एक बार पूंजी निवेश करने के बाद इसमें कोयला, गैस या पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन पर कोई खर्च नहीं होता. सौर ऊर्जा प्राकृतिक रूप से उपलब्ध है और यह India को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
उन्होंने Gujarat की ऐतिहासिक और औद्योगिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि धोलावीरा की पांच हजार वर्ष पुरानी कुम्हार परंपरा से लेकर मोरबी के आधुनिक सिरेमिक उद्योग तक, Gujarat की मिट्टी आज वैश्विक बाजार में India की पहचान बन चुकी है. नवाचार, तकनीक और निवेश के संगम से सिरेमिक सेक्टर इलेक्ट्रिक वाहन, हेल्थकेयर और ग्रीन टेक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है. विकसित India 2047 की यात्रा में यह क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभा रहा है.
Union Minister ने बताया कि 225 से अधिक एमएसएमई क्लस्टर, 12 हजार से ज्यादा स्टार्टअप, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और उद्यमशीलता की संस्कृति के चलते सौराष्ट्र क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है. यह क्षेत्र न केवल Gujarat बल्कि पूरे देश के औद्योगिक भविष्य की दिशा तय कर रहा है.
विकसित Gujarat के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से वीजीआरसी के दूसरे दिन आयोजित एमएसएमई कॉन्क्लेव का मुख्य लक्ष्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाना रहा. इस कॉन्क्लेव में स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने, तकनीकी उन्नयन और निवेश के नए अवसरों पर विशेष चर्चा की गई. साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने एमएसएमई सेक्टर को और मजबूत करने के लिए अपने अनुभव साझा किए.
एमएसएमई कॉन्क्लेव के दौरान सौराष्ट्र और कच्छ के औद्योगिक विकास के लिए 300 करोड़ रुपए से अधिक के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. साथ ही गोयल ने कहा कि ये समझौते रोजगार सृजन, औद्योगिक विस्तार और आत्मनिर्भर Gujarat के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे.
अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने आगे कहा कि India का ‘अमृत काल’ वर्ष 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है. विकसित India 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकसित Gujarat का निर्माण जरूरी है. इसी दिशा में Gujarat Government ने लगभग 60 लाख करोड़ रुपए के बुनियादी ढांचा विकास की व्यापक योजना तैयार की है, जिसमें एमएसएमई की भूमिका सबसे अहम होगी.
Union Minister ने कहा कि सौराष्ट्र और कच्छ में आयोजित यह क्षेत्रीय सम्मेलन स्थानीय उद्योगों और व्यापार को मजबूती देगा. इससे जीआई टैग वाले उत्पादों, एक जिला एक उत्पाद योजना और किसानों की उपज को भी बढ़ावा मिलेगा. इस तरह के सम्मेलन India और विदेशों के निवेशकों को एक साथ लाकर नई तकनीकों और नए अवसरों से परिचित कराते हैं, जिससे देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलती है.
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डीबीपी/एबीएस