ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर एक ईरानी अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है. अधिकारी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी हिंसा में अब तक करीब 2 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में आम प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के जवान, दोनों शामिल हैं. यह पहली बार है जब ईरान की सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में मौतों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है.
यह जानकारी एक ईरानी अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दी. अधिकारी ने अपना नाम उजागर नहीं किया. उन्होंने कहा कि इन मौतों के पीछे आतंकी तत्व जिम्मेदार हैं. उनके मुताबिक, इन्हीं लोगों की वजह से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों दोनों की जान गई. हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि मरने वालों में कितने आम नागरिक थे और कितने सुरक्षाकर्मी.
ईरान में प्रदर्शन की वजह क्या है?ईरान में यह अशांति देश की खराब आर्थिक स्थिति के कारण भड़की है. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार इजाफे से लोग नाराज हैं. जानकारों का कहना है कि यह पिछले तीन साल में ईरान की सरकार के सामने सबसे गंभीर आंतरिक संकट है. यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव में है, खासकर पिछले साल अमेरिका और इजराइल की ओर से हुए हमलों के बाद.
अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाएइसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सख्त रुख अपनाया है. सोमवार रात उन्होंने घोषणा की कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसके उत्पादों पर अमेरिका 25% आयात शुल्क लगाएगा. ईरान दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों में से एक है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अमेरिका सैन्य कदम उठाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. इससे पहले वह कह चुके हैं कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है.
ईरान ने ट्रंप के इस फैसले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि चीन ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. ईरान अपना ज्यादातर तेल चीन को बेचता है. इसके अलावा तुर्किये, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और भारत भी ईरान के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं.
ईरान की सरकार गिरने वाली है: मर्जईरान मामले पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि उन्हें लगता है कि ईरान की मौजूदा सरकार अपने अंतिम दौर में है. उनका कहना था कि अगर कोई सरकार सत्ता बचाने के लिए हिंसा का सहारा लेती है, तो उसका अंत नजदीक होता है. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस बयान को खारिज करते हुए जर्मनी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे बयानों से उसकी विश्वसनीयता खत्म होती है.