Joint ITR Filing: पति-पत्नी साथ में रिटर्न भर बचा सकते हैं हजारों का टैक्स
TV9 Bharatvarsh January 15, 2026 01:43 PM

इस बार बजट 2026, 1 फरवरी को आ रहा है, जिसको लेकर इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि पति और पत्नी को साथ में यानी ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प दिया जाना चाहिए. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाखों मिडिल क्लास परिवारों को सीधे तौर पर टैक्स में राहत मिल सकती है.

फिलहाल भारत में पति और पत्नी को अलग-अलग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ता है, चाहे परिवार की पूरी आमदनी एक ही व्यक्ति पर क्यों न टिकी हो. नई टैक्स रिजीम में हर व्यक्ति को अलग बेसिक टैक्स छूट मिलती है. लेकिन जिन परिवारों में केवल पति कमाते हैं और पत्नी की कोई आय नहीं है, उन्हें इस डबल छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता. यही वजह है कि टैक्स का बोझ अक्सर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है.

ज्वाइंट टैक्सेशन से कैसे मिलेगा फायदा

ICAI का कहना है कि अगर पति और पत्नी को साथ में टैक्स रिटर्न फाइल करने की इजाजत मिल जाए, तो परिवार की कुल इनकम को एक साथ देखा जाएगा. इससे टैक्स की गणना ज्यादा संतुलित तरीके से हो सकेगी. खासकर सिंगल इनकम वाले परिवारों को राहत मिलेगी, क्योंकि पूरी कमाई एक ही व्यक्ति के नाम पर दिखाने से हाई टैक्स स्लैब लग जाता है. ज्वाइंट टैक्सेशन लागू होने पर परिवार की संयुक्त आय पर टैक्स लगेगा, जिससे टैक्स स्लैब धीरे-धीरे ऊपर जाएगा और टैक्स की रकम कम हो सकती है. इसका सीधा असर लोगों की सेविंग्स पर पड़ेगा.

गलत तरीकों से भी मिलेगी राहत

आज कई परिवार टैक्स बचाने के लिए इनकम को कागजों पर दूसरे सदस्य के नाम से दिखाते हैं, ताकि टैक्स कम लगे. ICAI मानता है कि यह सिस्टम लोगों को ऐसी मजबूरी में डालता है. अगर ज्वाइंट ITR फाइलिंग की सुविधा मिल जाती है, तो लोगों को ऐसी प्लानिंग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनेगा.

दुनिया के कई देशों में पहले से लागू सिस्टम

अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल जैसे देशों में पति-पत्नी को ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प मिलता है. अमेरिका में इसे मैरिड फाइलिंग ज्वाइंटली कहा जाता है. वहां ज्वाइंट फाइलिंग करने पर टैक्स स्लैब भी ज्यादा बड़ा हो जाता है, जिससे ज्यादा इनकम होने पर भी टैक्स का बोझ कम पड़ता है. यूरोप के कई देशों में भी फैमिली आधारित टैक्सेशन सिस्टम है, जिससे परिवारों को राहत मिलती है.

भारत में दोनों विकल्प मिल सकते हैं

ICAI ने यह भी सुझाव दिया है कि ज्वाइंट टैक्सेशन को ज़रूरी न बनाकर एक विकल्प की तरह पेश किया जाए. यानी जो पति-पत्नी चाहें वे ज्वाइंट रिटर्न फाइल करें और जो मौजूदा सिस्टम में रहना चाहें, उन्हें भी वही सुविधा मिले. साथ ही ज्वाइंट फाइलिंग में बेसिक टैक्स छूट को दोगुना करने की बात भी कही गई है. अगर ऐसा हुआ, तो 8 लाख रुपये तक की सालाना फैमिली इनकम टैक्स फ्री हो सकती है.

अगर यूनियन बजट 2026 में ज्वाइंट ITR फाइलिंग की घोषणा होती है, तो यह मिडिल क्लास के लिए राहत भरी खबर होगी. इससे न सिर्फ टैक्स कम होगा, बल्कि रिटर्न फाइल करना भी आसान बनेगा. खासकर ऐसे परिवारों को फायदा होगा, जिन्होंने घर या प्रॉपर्टी ज्वाइंट नाम से खरीदी है, लेकिन कमाने वाला एक ही सदस्य है.

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