News India Live, Digital Desk : माघ का महीना चल रहा है और कड़ाके की ठंड के बीच भक्ति का माहौल भी गर्म है। हमारे हिंदू धर्म में यूँ तो साल भर में कई अमावस्या आती हैं, लेकिन 'मौनी अमावस्या' (Mauni Amavasya) की बात ही कुछ और है। इसे साल की सबसे बड़ी और प्रभावशाली अमावस्या माना जाता है।जैसा कि नाम से ही साफ़ है 'मौनी' यानी 'मौन'। यह वो दिन है जब कहा जाता है कि अगर आप अपनी वाणी को विराम दे दें, यानी चुप रहें, तो आपको कई हजार यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिल सकता है। आज हम आसान शब्दों में बात करेंगे कि 2026 में यह शुभ दिन कब पड़ रहा है और आपको इसका लाभ कैसे उठाना है।कब है मौनी अमावस्या? (तारीख और मुहूर्त)अक्सर त्योहारों की तारीखों को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन रहता है। पंचांग के अनुसार, इस साल माघ महीने की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 (रविवार) को मनाई जा रही है।रविवार का दिन और ऊपर से अमावस्या, इसे 'सूर्य देव' और पितरों की पूजा के लिए बहुत खास संयोग माना जा रहा है।स्नान-दान का महत्व: अगर गंगा नहीं जा पाए तो?हम सब जानते हैं कि इस दिन संगम (प्रयागराज) या गंगा में डुबकी लगाने वालों का तांता लगा रहता है। माना जाता है कि इस दिन गंगा जल अमृत के समान होता है। लेकिन हममें से बहुत से लोग काम-काज की वजह से गंगा किनारे नहीं जा पाते। तो क्या करें?निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं है। हमारे बुजुर्ग कहते हैं कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। आप अपने घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल (अगर हो तो) और कुछ दाने काले तिल के मिला लें। सूर्य निकलने से पहले इस पानी से नहाएं और मन ही मन हर-हर गंगे का जाप करें। आपको तीर्थ स्नान जितना ही पुण्य मिलेगा।क्यों रहना चाहिए 'चुप'? (मौन का महत्व)अब आते हैं सबसे दिलचस्प हिस्से पर—मौन व्रत। कहते हैं कि हम अपनी ऊर्जा का सबसे ज्यादा हिस्सा बोलने में खर्च कर देते हैं। मौनी अमावस्या हमें यह याद दिलाने आती है कि कभी-कभी चुप रहकर भी खुद से बात करना ज़रूरी होता है।जरूरी नहीं कि आप पूरा दिन एक शब्द न बोलें (अगर कर सकें तो बहुत अच्छा है)। लेकिन कम से कम इतना संकल्प लें कि इस दिन किसी को कड़वा नहीं बोलेंगे, झूठ नहीं बोलेंगे और किसी की बुराई नहीं करेंगे। यह 'मानसिक मौन' भी आपको अद्भुत शांति देगा।ये छोटे उपाय संवारेंगे जीवनपितरों को खुश करें: अमावस्या का दिन हमारे पूर्वजों का दिन होता है। नहाने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और अपने पितरों के नाम से थोड़ा जल और तिल अर्पित करें।गर्म कपड़ों का दान: चूंकि ठंड बहुत है, इसलिए किसी ज़रूरतमंद को कंबल या ऊनी कपड़े दान करें। कहते हैं कि माघ में तिल और कंबल का दान कभी खाली नहीं जाता।तो दोस्तों, इस रविवार (18 जनवरी) तैयार हो जाइए, अपने तन और मन को शुद्ध करने के लिए। थोड़ा सा मौन रखिए, और देखिये आपको भीतर से कितना अच्छा महसूस होता है। आप सभी को मौनी अमावस्या की ढेर सारी शुभकामनाएं!