इंफाल, 15 जनवरी . मणिपुर Government ने मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए करीब 60,000 लोगों के पुनर्वास के लिए 523 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज को लागू किया है. ये आंतरिक रूप से विस्थापित लोग (आईडीपी) पिछले लगभग दो वर्षों से राहत शिविरों में रह रहे हैं. अधिकारियों ने Thursday को यह जानकारी दी.
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मणिपुर बजट 2025-26 में घोषित 523 करोड़ रुपये के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज के तहत चरणबद्ध तरीके से विस्थापित परिवारों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
मणिपुर में 13 फरवरी 2024 से President शासन लागू है. ऐसे में Lok Sabha ने 7 अगस्त 2024 को मणिपुर के लिए वर्ष 2025-26 का बजट पारित किया था, जिसमें कुल 30,969.44 करोड़ रुपये (मार्च 2025 में प्रस्तुत 35,103.90 करोड़ रुपये) के खर्च को मंजूरी दी गई. यह बजट संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्तुत किया था.
अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में उन परिवारों को पुनः बसाया जाएगा, जिनके मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं. दूसरे चरण में Prime Minister आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत विशेष पैकेज में उपलब्ध कराए गए घरों में, संबंधित जिलों के भीतर परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा.
तीसरे चरण में घाटी और पहाड़ी जिलों के बीच अंतर-जिला पुनर्वास किया जाएगा, जिसमें बेहतर समन्वय, बुनियादी ढांचे का विकास और सुरक्षा व्यवस्था शामिल होगी.
गृह विभाग के विशेष सचिव ए. सुभाष सिंह ने आईडीपी प्रतिनिधियों और मणिपुर इंटेग्रिटी के लिए समन्वय समिति (कोकोएमआई), जो मैतेई समुदाय की शीर्ष संस्था है, को लिखे पत्र में कहा कि राज्य Government के लिए विस्थापित लोगों का पुनर्वास और पुनर्स्थापन सर्वोच्च मानवीय प्राथमिकता बना हुआ है.
पत्र में कहा गया, “यह स्पष्ट किया जाता है कि पुनर्वास कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें सुरक्षा स्थिति, स्थल की तैयारी, भूमि की उपलब्धता, धन का प्रवाह, मौसम की स्थिति और आजीविका की संभावनाएं शामिल हैं. इसी कारण यह प्रक्रिया किसी एक तय समयसीमा के बजाय चरणबद्ध, व्यावहारिक और लचीले तरीके से लागू की जा रही है.”
इस बीच, 12 जनवरी को सैकड़ों हिंसा प्रभावित विस्थापित लोगों ने इंफाल में विरोध रैली निकाली और अपने पुनर्वास को लेकर मणिपुर के Governor अजय कुमार भल्ला से सकारात्मक पहल की मांग की.
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डीएससी