Shani Dev: राजा से रंक बना देते हैं शनिदेव, लेकिन हनुमान जी और भोलेनाथ के भक्तों पर क्यों नहीं पड़ती टेढ़ी दृष्टि?
TV9 Bharatvarsh January 17, 2026 02:43 PM

Shani Dev: हिंदू धर्म में शनिदेव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता कहा गया है. वहीं ज्योतिष शाास्त्र में शनिदेव एक महत्वपूर्ण ग्रह के रूप में देखे जाते हैं जो हर ढाई साल में एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं. शनि देव लोगों को उनके कर्मों के अनुसार, फल और दंड देते हैं. शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है. इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है.

लोग शनिदेव का नाम सुनते ही भयभीत हो जाते हैं. इसका कारण है शनिदेव की टेढ़ी यानी वक्र दृष्टि. माना जाता है कि शनिदेव अगर प्रसन्न हो जाएं तो रंक को राजा बना देते हैं. वहीं अगर उन्होंने व्यक्ति पर अपनी वक्र दृष्टि डाली तो उसका जीवन परेशानियों से घिर जाता है, लेकिन कहा जाता है कि हनुमान जी और भोलेनाथ के भक्तों पर शनिदेव की टेढ़ी दृष्टि नहीं पड़ती. आइए जानते हैं इसका कारण क्या है?

हनुमान जी ने कारागार से किया था मुक्त

पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमान जी जब माता सीता की तलाश करते हुए लंका पहुंचे तो वहां उन्होंने शनि देव को बंदी बने देखा. इसके बाद हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया. इस पर खुश होकर शनिदेव ने हनुमान जी को वरदान दिया कि वो उनकी आराधना करने वाले को कभी कष्ट नहीं देंगे. यही कारण है कि साढ़ेसाती और ढैय्या के समय हनुमान जी के पूजन की सलाह दी जाती है.

एक दूसरी कथा के अनुसार, अहंकार में डूबे शनिदेव ने हनुमान जी के जाप में बाधा डालने का प्रयास किया. शनिदेव ने उनका ध्यान भंग करने की कई कोशिशे कीं. उन्होंने अपनी शक्ति का डर दिखाकर उनको डराने का प्रयास भी किया, लेकिन हनुमान जी पर कोई प्रभाव न हुआ. तब शनिदेव का क्रोध सातवें आसमन पर पहुंच गया. अंत में शनिदेव ने हनुमान जी को चुनौती डे डाली.

शनिदेव को पत्थरों पर पटका था

इसके बाद हनुमान जी ने कहा कि वो प्रभु राम की भक्ति में लीन हैं, इसलिए वो उनकी शांति भंग न करें, लेकिन शनिदेव ने हनुमान जी की बांह पकड़ ली. फिर बजरंगबली ने क्रोध में शनिदेव को अपनी पूंछ में लपेट लिया. इतने में भी शनिदेव उन्हें ललकारना नहीं छोड़ा. शनिदेव ने कहा कि कहा कि तुम क्या तुम्हारे श्रीराम भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते. इस पर क्रोध में हनुमान जी उनको पत्थर पर पटकना शुरू कर दिया.

अंत में शनि देव ने बजरंगबली से माफी मांगी. तब हनुमान जी ने उनसे कहा कि भविष्य भी ऐसी उद्दंडता मत करना और न ही मेरे भक्तों को सताना. तभी से हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव टेढ़ी दृष्टि नहीं डालते और ना ही उनको सताते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने शनिदेव को कर्म दंडाधिकारी का पद दिया है. भगवान सूर्य ने शनिदेव को विभिन्न लोकों का अधिपत्य प्रदान किया.

इसलिए शिव भक्तों पर वक्र दृष्टि नहीं डालते

इसके बाद भी उन्होंने दूसरों लोकों पर कब्जा कर लिया. तब सूर्यदेव ने भगवान शिव से शनिदेव को सही मार्ग दिखाने का निवेदन किया. इसके बाद भगवान शिव ने अपने गणों को शनिदेव से युद्ध के लिए भेजा लेकिन शनि देव ने सबको परास्त कर दिया. अंत शिव जी ने शनिदेव से युद्ध किया. युद्ध के दौरान उन्होंने शिव जी पर वक्र दृष्टि डाली. तब महादेव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर शनिदेव को नष्ट कर दिया.

भगवान भोलेनाथ ने अपने त्रिशूल के अचूक प्रहार से शनिदेव को संज्ञाशून्य कर दिया और 19 सालों के लिए पीपल के वृक्ष से उल्टा लटका दिया. इस दौरान शनिदेव भगवान शिव की अराधना करते रहे, इसीलिए कहा जाता है कि भगवान शिव के भक्तों पर कभी भी शनिदेव अपनी वक्र दृष्टि नहीं डालते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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