अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ईरान में अली खामेनेई सरकार के तख्तापलट का प्लान तैयार कर लिया है. जल्द ही इसे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने पेश किया जाएगा. पेंटागन ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों के साथ मिलकर यह प्लान तैयार किया है. ट्रंप ने 14 जनवरी को एक हाईलेवल मीटिंग में अधिकारियों से निर्णायक प्लान तैयार करने के लिए कहा था.
वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक ईरान में अब शांति है. सरकार ने सड़कों पर हो रहे विरोध को कंट्रोल कर लिया है. इसके बावजूद पेंटागन के अधिकारी तेहरान को लेकर माथापच्ची कर रहे हैं. अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पेंटागन के अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद एक प्लान तैयार किया है.
पेंटागन के इस प्लान में क्या है?वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी इस रिपोर्ट में बताया है कि जो ईरान को लेकर जो प्लान तैयार किया गया है, उसमें ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के कुछ ठिकानों पर हमला भी है. यह रिपोर्ट हवाई और जमीनी दोनों हमले के मद्देनजर तैयार किया गया है. ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड को काफी अहम माना जाता है. इसके पास 1.5 लाख एक्टिव सदस्य हैं, जिसका मुख्य काम इस्लामिक गणराज्य व्यवस्था को बनाए रखना है.
यह प्लान ऐसे वक्त में तैयार किया गया है, जब सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अंडरग्राउंड हो गए हैं. बीबीसी फारसी के मुताबिक 17 जनवरी को आखिरी बार खामेनेई को देखा गया था. इसके बाद वे अंडरग्राउंड हो गए हैं. खामेनेई को जून 2025 में भी अंडरग्राउंड कर दिया गया था.
ईरान में तख्तापलट की कोशिश क्यों?ईरान मिडिल ईस्ट का सबसे अहम देश है. यहां दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा तेल और नेचुरल गैस का भंडार है. इसके अलावा ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा है, जो व्यापारिक दृष्टिकोण से सबसे अहम माना जाता है. दुनियाभर का 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है. 1979 के बाद से ही यहां अमेरिका का कंट्रोल खत्म हो गया है. अमेरिका इसे किसी भी सूरत में वापस पाना चाहता है.
इसके अलावा ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका के धुर-विरोधी हैं. कई मौकों पर खामेनेई अमेरिका पर सीधा हमला कर चुके हैं. वहीं मिडिल ईस्ट के देशों का कहना है कि ईरान लगातार प्रॉक्सी संगठनों के जरिए पूरे इलाके को कंट्रोल करना चाहता है. हिजबुल्लाह, हमास और हूती को ईरान का प्रमुख प्रॉक्सी संगठन माना जाता है.
ईरान में तख्तापलट क्यों नहीं आसान?ईरान की शासन व्यवस्था काफी जटिल है. एक तरफ सुप्रीम लीडर खामेनेई के पास सेना और न्यायपालिका से जुड़े सभी अधिकार हैं. वहीं दूसरी तरफ वहां पर राष्ट्रपति चुनकर आते हैं, जिनके जिम्मे आर्थिक हालात को सुधारना और नीति तैयार करना है.
ईरान में कैबिनेट और संसद की भी व्यवस्था है. यानी वहां पर सिर्फ खामेनेई को खत्म कर तख्तापलट नहीं किया जा सकता है.