दावोस/इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में 'पीस ऑफ बोर्ड' का उद्घाटन किया, जिसमें पहले दिन लगभग 20 देशों ने हस्ताक्षर किए। कुल 35 देशों ने इस चार्टर को स्वीकार किया, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का इस बोर्ड में शामिल होना और चार्टर पर हस्ताक्षर करना पाकिस्तान में विवाद का कारण बन गया है।
पाकिस्तानी विपक्ष और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि शहबाज का यह कदम 'ट्रंप के बूट पॉलिश नीति' के समान है, जो राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करता है।
पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान का 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का निर्णय बिना किसी सार्वजनिक बहस या संसद की राय के लिया गया है, जो इस शासन की पाकिस्तानी राष्ट्र के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। यह निर्णय निम्नलिखित कारणों से गलत है:
इसलिए, शहबाज शरीफ का यह निर्णय बिना संसदीय बहस के लिया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी है। पाकिस्तान जैसे देश को ऐसे एकतरफा और अमेरिका-केंद्रित मंच में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय हितों और वैश्विक शांति की वास्तविकता पर गहन विचार करना चाहिए था।"
यूएन में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने भी इन सवालों को वैध ठहराया है। उन्होंने लिखा, "पाकिस्तान ने एक 'संगठन' (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने के लिए साइन अप किया है, जिसे ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में पेश करते हैं। क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों का पालन करने से अधिक महत्वपूर्ण है?"
ट्रंप के पीस ऑफ बोर्ड में इजरायल भी शामिल है, जिसे पाकिस्तानी लोग अपनी मुस्लिम ब्रदरहुड धारा का दुश्मन मानते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान गाजा में अपने शांति सैनिक भेजे, जो इस्लामिक सिद्धांत के खिलाफ होगा। यदि पाकिस्तान इससे इनकार करता है, तो ट्रंप नाराज हो जाएंगे। इसलिए, यह निर्णय शहबाज के लिए एक चुनौती बन गया है।