मुंबई, 23 जनवरी। भारत में ऋतुओं का विशेष महत्व है, जिसमें वसंत को सबसे प्रमुख माना जाता है। इसे जीवन, खुशी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। जैसे-जैसे सर्दी की ठंडक समाप्त होती है, सुनहरी धूप का आगमन होता है, और खेतों में गेहूं की फसलें लहराने लगती हैं। इस समय चना और सरसों के पीले-हरे फूल खिलकर चारों ओर सौंदर्य बिखेरते हैं। इसी अद्भुत वातावरण में मां सरस्वती का आगमन होता है, जो ज्ञान और कला की देवी मानी जाती हैं।
प्राचीन काल से, हमारे संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं ने वसंत को विभिन्न तरीकों से प्रस्तुत किया है। इसे कभी मां सरस्वती की स्तुति के रूप में, कभी प्रेम और प्राकृतिक सौंदर्य के उत्सव के रूप में, और कभी बदलाव के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है।
भारतीय शास्त्रीय संगीत में वसंत का अद्भुत रूप देखने को मिलता है। फिल्म 'आलाप' का गाना 'माता सरस्वती शारदेय' वसंत के इस भाव को दर्शाता है। यह केवल एक साधारण फिल्मी गाना नहीं है, बल्कि एक सुकून देने वाली स्तुति है। इसमें सुरों के माध्यम से बताया गया है कि वसंत वह समय है, जब सीखने, गाने और कुछ नया रचने की शुरुआत होती है। यह गीत इंसान को अपने अंदर सुधार लाने के लिए प्रेरित करता है।
वसंत को खूबसूरती से दर्शाने वाले गानों में से एक है 1967 की फिल्म 'उपकार' का गीत 'आई झूम के वसंत', जो सुनते ही दिल को खुशी से भर देता है। इस गाने में वसंत को एक त्योहार के रूप में मनाया गया है, जहां लोग, खेत, हवा और फसल सब मिलकर जश्न मनाते हैं। इसे गुलशन बावरा ने लिखा और कल्याणजी-आनंदजी ने संगीत दिया।
1968 में आई फिल्म 'राजा और रंक' का गाना 'संग बसंत अंग बसंती' भी बेहद आकर्षक है। यह गाना बताता है कि यह प्यार का मौसम है। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, दिल के एहसास भी बदलते हैं। फूलों की तरह भावनाएं भी खिलने लगती हैं। आनंद बख्शी ने इसके बोल लिखे हैं और लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने संगीत दिया है।
पुरानी फिल्मों में वसंत को जीवन से जोड़कर भी दर्शाया गया है। 1947 की फिल्म 'सिंदूर' का गाना 'पतझड़ सावन बसंत बहार' इसी सोच का उदाहरण है। यह गाना बताता है कि जिंदगी भी मौसम की तरह होती है। कभी मुश्किल समय आता है, कभी खुशी का दौर, और कभी वसंत जैसी नई उम्मीद। इस गीत की खासियत यह है कि यह बिना भारी शब्दों के जीवन की सच्चाई को समझाता है। शमशाद बेगम की आवाज और खेमचंद प्रकाश के संगीत ने इस गाने को अमर बना दिया।
वसंत को आजादी और ताजगी से जोड़ने वाला गीत 'रुत आ गई रे, रुत छा गई रे' भी बहुत खूबसूरत है। इस गाने में वसंत को प्यार करने और खुश रहने के मौसम के रूप में दर्शाया गया है। यह गाना बताता है कि वसंत केवल देखने का नहीं, बल्कि महसूस करने का मौसम है। इसके बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं और आर.डी. बर्मन ने संगीत दिया है।
नई पीढ़ी के बीच फिल्म 'रंग दे बसंती' का टाइटल सॉन्ग बेहद लोकप्रिय है। यह गाना वसंत को केवल फूलों और मौसम तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे बदलाव और जागरूकता का प्रतीक मानता है। यहां वसंत का मतलब सोच बदलना, आवाज उठाना और सही के लिए खड़े होना है। यही वजह है कि यह गाना आज भी युवाओं को जोश से भर देता है। इसके बोल प्रसून जोशी और ए.आर. रहमान ने दिए हैं।