गणतंत्र दिवस 2026: राष्ट्रवाद पर पढ़िए प्रेरणादायक विशेष निबंध
Webdunia Hindi January 23, 2026 11:45 PM

Essay on nationalism: गणतंत्र दिवस भारत के संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र के प्रति नागरिक कर्तव्यों को याद करने का अवसर है। इस विशेष मौके पर पढ़िए राष्ट्रवाद के अर्थ, महत्व और आज के संदर्भ में उसकी भूमिका पर आधारित विशेष निबंध। गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। आज जब राष्ट्रवाद की अवधारणा पर व्यापक बहस हो रही है, तब यह जरूरी है कि उसके मूल भाव, लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी दृष्टिकोण को समझा जाए। प्रस्तावना

राष्ट्रवाद केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह भावना है जो एक भौगोलिक भू-भाग को 'देश' और वहाँ रहने वाले विविध समुदायों को एक 'राष्ट्र' बनाती है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ कदम-कदम पर भाषाएँ और संस्कृतियाँ बदलती हैं, राष्ट्रवाद वह अदृश्य धागा है जो 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में पिरोता है। गणतंत्र दिवस इसी राष्ट्रवादी चेतना का उत्सव है, जो हमें याद दिलाता है कि हम सर्वोपरि रूप से एक 'गणतंत्र' के नागरिक हैं।

राष्ट्रवाद का अर्थ और भारतीय परिप्रेक्ष्य

सामान्य अर्थ में राष्ट्रवाद अपने देश के प्रति प्रेम, निष्ठा और समर्पण की भावना है। भारतीय संदर्भ में, हमारा राष्ट्रवाद 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के दर्शन से प्रेरित है। हमारा राष्ट्रवाद संकीर्ण नहीं है; यह समावेशी है। यह हमें सिखाता है कि अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए भी हम विश्व शांति और मानवता का सम्मान करें।

स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवाद की लौ

भारतीय राष्ट्रवाद का आधुनिक स्वरूप हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान निखरा। जब मंगल पांडे की शहादत, भगत सिंह का बलिदान, सुभाष चंद्र बोस का साहस और महात्मा गांधी का सत्य-अहिंसा का मार्ग एक हुआ, तब एक अखंड राष्ट्रवादी चेतना का जन्म हुआ। इसी भावना ने हमें ब्रिटिश साम्राज्य की बेड़ियों से मुक्त कराया और 26 जनवरी 1950 को अपने स्वयं के संविधान के तहत एक गणराज्य के रूप में स्थापित किया।

आधुनिक भारत में राष्ट्रवाद के आयाम

राष्ट्रवादी: आज के दौर में राष्ट्रवाद केवल सीमा पर जाकर लड़ने तक सीमित नहीं है। आज एक सच्चा राष्ट्रवादी वह है जो-

संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करता है: न्याय, स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों को मानता है।

कर्तव्य का पालन करता है: करों का भुगतान करना, पर्यावरण की रक्षा करना और स्वच्छता बनाए रखना भी राष्ट्रवाद है।

सामाजिक समरसता: जाति, धर्म और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज की सेवा करना।

इतिहास गौरव बोध को जगाता: यह देश के सच्चे इतिहास का प्रतिनिधित्व करके लोगों के मन में गौरव बोध जागृत करता है।

आत्मनिर्भरता: आर्थिक रूप से देश को मजबूत बनाना और स्वदेशी नवाचारों (Innovations) को बढ़ावा देना।

राष्ट्रवाद और चुनौतियां

अति-राष्ट्रवाद या अंध-राष्ट्रवाद कई बार समाज में विभाजन का कारण बन सकता है। सच्चा राष्ट्रवाद वह है जो आलोचना को स्वीकार करे और सुधार की दिशा में बढ़े। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा राष्ट्रवाद घृणा पर नहीं, बल्कि विकास और प्रेम पर आधारित हो। यह सभी जाति, धर्म और संप्रदाय का सम्मान करता हो।

उपसंहार

गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान गाना गर्व की बात है, लेकिन राष्ट्रवाद की असली परीक्षा हमारे दैनिक कार्यों में है। जब हम एक बेहतर नागरिक बनते हैं, तो हम वास्तव में राष्ट्र को मजबूत करते हैं। आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम संकल्प लें कि हमारा राष्ट्रवाद केवल नारों तक सीमित न रहकर, देश के निर्माण और उत्थान का माध्यम बने।

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.