नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर जो इंतजार लंबे समय से चल रहा था, वह अब खत्म होता दिख रहा है। आयोग के गठन के लगभग तीन महीने बाद, इसे दिल्ली के दिल कहे जाने वाले इलाके में अपना स्थायी ठिकाना मिल गया है। ऑफिस मिलते ही अब कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने और विसंगतियों को दूर करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू होने वाला है।
चंद्रलोक बिल्डिंग से तय होगा करोड़ों कर्मचारियों का भविष्यसरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए नई दिल्ली के जनपथ स्थित ‘चंद्रलोक बिल्डिंग’ में जगह आवंटित कर दी है। अब तक अपना कार्यालय न होने की वजह से काम की रफ्तार थोड़ी धीमी थी, लेकिन अब फाइलों का मूवमेंट तेज होने की उम्मीद है। इसी ऑफिस में बैठकर विशेषज्ञ देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और रिटायर्ड कर्मियों की पेंशन से जुड़े ऐतिहासिक फैसले लेंगे। सरकार का यह कदम साफ इशारा है कि वह इस प्रक्रिया को बिना किसी देरी के समय पर पूरा करना चाहती है।
25 फरवरी की तारीख है बेहद खास, तैयार होगा ‘मास्टर प्लान’जैसे ही आयोग को दफ्तर मिला, कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी कमर कस ली है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘नेशनल काउंसिल’ की स्टाफ साइड ड्राफ्टिंग कमेटी ने 25 फरवरी 2026 को दिल्ली में एक बड़ी मीटिंग बुलाई है। फिरोजशाह रोड पर होने वाली इस बैठक में रेलवे, डिफेंस, डाक विभाग और इनकम टैक्स जैसे बड़े विभागों के दिग्गज शामिल होंगे। खबर तो यह भी है कि यह चर्चा सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि पूरे एक हफ्ते तक चल सकती है ताकि किसी भी मुद्दे में कोई कमी न रह जाए।
क्या बढ़ जाएगी आपकी बेसिक सैलरी? इन मुद्दों पर रहेगी नजरइस महा-बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा एक ठोस ‘मेमोरेंडम’ यानी मांग पत्र तैयार करना है। इसमें मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, महंगाई भत्ते (DA), प्रमोशन की पॉलिसी और काम करने की शर्तों में बड़े बदलावों की मांग की जाएगी। साथ ही, पेंशनर्स के लिए पेंशन रिवीजन और बेहतर मेडिकल सुविधाओं पर भी विस्तार से बात होगी। स्टाफ साइड की कमेटी इन सभी मांगों का एक कच्चा चिट्ठा तैयार करेगी और जैसे ही जनपथ वाला ऑफिस पूरी तरह चालू होगा, इसे आधिकारिक तौर पर सौंप दिया जाएगा।
7वें वेतन आयोग की गलतियों से लिया सबकजल्द ही 8वां वेतन आयोग एक नोटिफिकेशन जारी कर मंत्रालयों और राज्य सरकारों से सुझाव मांगेगा। लेकिन इस बार कर्मचारी संगठन बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। याद दिला दें कि 7वें वेतन आयोग के समय संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी 26,000 रुपये करने की मांग की थी, लेकिन तब इसे सिर्फ 18,000 रुपये ही रखा गया था। इस बार तैयारी ऐसी है कि तर्कों और आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी जाए, जिसे आयोग चाहकर भी नजरअंदाज न कर पाए।