Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी पर अनजाने में भी न करें ये गलतियां, वरना पुण्य की जगह लग सकता है दोष!
TV9 Bharatvarsh January 25, 2026 03:44 PM

Ekadashi Fasting Rules: भगवान विष्णु के भक्तों के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी को बेहद कल्याणकारी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि उसे पिशाच योनि और प्रेत बाधाओं से भी मुक्ति मिल जाती है. पंचांग के अनुसार, इस साल जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. हालांकि, कई बार हम श्रद्धा की वजह से कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता. आइए जानते हैं वे कौन सी बातें हैं जिनका ध्यान रखना जरूरी है.

जया एकादशी पर न करें ये गलतियां! चावल का सेवन है वर्जित

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना सबसे बड़ी भूल मानी जाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन करना ‘रेंगने वाले जीव’ की योनि में जन्म लेने के समान माना गया है. अगर आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी इस दिन चावल से परहेज करना चाहिए.

वाणी पर संयम और क्रोध का त्याग

जया एकादशी का व्रत केवल पेट का नहीं, बल्कि मन का भी होना चाहिए. इस दिन किसी की निंदा करना, झूठ बोलना या गुस्सा करना आपके पुण्य को कम कर सकता है. विवादों से दूर रहें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते रहें.

तुलसी दल तोड़ने की गलती

भगवान विष्णु को तुलसी बहुत ही प्रिय है और उनके भोग में तुलसी का होना अनिवार्य है. लेकिन ध्यान रहे, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. आपको व्रत के लिए पत्ते एक दिन पहले (दशमी तिथि को) ही तोड़कर रख लेने चाहिए.

ब्रह्मचर्य और सात्विकता

एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है. इसके साथ ही घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का प्रवेश भी नहीं होना चाहिए. इस दिन मसूर की दाल और शहद का सेवन भी वर्जित बताया गया है.

दान का अपमान न करें

व्रत के दिन यदि कोई भिक्षु या जरूरतमंद आपके द्वार पर आए, तो उसे खाली हाथ न भेजें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न या धन का दान करें. किसी का अपमान करने से व्रत खंडित माना जाता है.

जया एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. जया एकादशी का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसका व्रत करने से मनुष्य को प्रेत योनि, पिशाच योनि या बुरी आत्माओं के भय से मुक्ति मिल जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब स्वर्ग में एक गंधर्व (पुष्पवंत) और एक अप्सरा (पुष्पवती) को श्राप के कारण पिशाच बनना पड़ा था, तब अनजाने में जया एकादशी का व्रत होने के कारण ही उन्हें इस कष्टदायक योनि से मुक्ति मिली थी और वे फिर से अपने दिव्य स्वरूप में लौटे थे.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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