भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों की नई दिशा
नई दिल्ली में भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। यह बैठक दोनों पक्षों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों का सामना कर रहे हैं और नए व्यापारिक अवसरों की तलाश में हैं। यदि यह व्यापार समझौता सफल होता है, तो यह न केवल भारत और यूरोप के लिए, बल्कि अन्य देशों के लिए भी नए अवसरों का द्वार खोलेगा।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत बिना किसी अतिरिक्त निवेश के यूरोपीय संघ को 10 से 11 अरब डॉलर का अतिरिक्त निर्यात कर सकता है। यह 'स्मार्ट शिफ्ट' के माध्यम से संभव होगा, जिसमें अमेरिका को भेजे जाने वाले उच्च-टैरिफ वाले सामानों को यूरोपीय बाजार की ओर मोड़ा जाएगा। यह विश्लेषण उस समय आया है जब पिछले तीन वर्षों से भारत-ईयू माल व्यापार लगभग 136.5 बिलियन डॉलर पर स्थिर है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत-ईयू का माल व्यापार पिछले तीन वर्षों से 136.5 बिलियन डॉलर पर स्थिर है। वित्त वर्ष 2025 में, यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय माल व्यापार भागीदार बन गया है, जिसने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, भारत की हिस्सेदारी यूरोपीय संघ के आयात में केवल 2.9 प्रतिशत और निर्यात में 1.9 प्रतिशत है, जो रणनीतिक इरादों और वास्तविक व्यापार परिणामों के बीच का अंतर दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ का माल व्यापार 2024 में 164 अरब डॉलर तक बढ़ गया है। हालांकि, नए टैरिफ संबंधी खतरों और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण व्यापार में परेशानी बढ़ने की संभावना है। इस संदर्भ में, प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
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