नई दिल्ली, 30 जनवरी। थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर किया है।
इस कैविएट के माध्यम से सेंसर बोर्ड ने अदालत से अनुरोध किया है कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती, तब तक कोई भी एकतरफा या प्रतिकूल आदेश न दिया जाए। यह कदम मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के हालिया आदेश के बाद उठाया गया है, जिसने सिंगल जज के उस निर्णय को रद्द कर दिया था, जिसमें फिल्म को यूए 16+ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था।
फिल्म 'जन नायकन' 9 जनवरी को पोंगल के अवसर पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने अब तक सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है। पहले, बोर्ड ने कुछ कट्स के साथ यूए सर्टिफिकेट देने का निर्णय लिया था, लेकिन बाद में शिकायतों के आधार पर इसे रिवाइजिंग कमेटी को भेज दिया गया। निर्माताओं ने इस देरी के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया।
9 जनवरी को कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया कि फिल्म को यूए सर्टिफिकेट जारी किया जाए। साथ ही, निर्माताओं को याचिका में संशोधन करने की अनुमति भी दी गई। इस बीच, निर्माताओं ने डिवीजन बेंच के अंतरिम स्टे को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और मद्रास हाईकोर्ट को 20 जनवरी तक निर्णय लेने का निर्देश दिया।
निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने दिसंबर 2025 में फिल्म को सीबीएफसी के पास जमा किया था। बोर्ड की प्रारंभिक जांच में कुछ दृश्यों में कट्स और संवादों को म्यूट करने की सलाह दी गई थी। निर्माताओं ने सभी सुझाए गए बदलावों को लागू कर फिल्म को फिर से बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया।
'जन नायकन' थलापति विजय की अंतिम फिल्म मानी जा रही है, जिसमें पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, और प्रकाश राज जैसे सितारे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। इसके बाद विजय के राजनीति में सक्रिय होने की चर्चा है।
सेंसर बोर्ड का कहना है कि उन्हें सभी शिकायतों और नियमों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है, जबकि निर्माता इस देरी को अनुचित मानते हैं।