2026-27 के बजट को मिली मंजूरी: इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और तकनीक को प्राथमिकता
Tarunmitra February 02, 2026 10:42 AM

  • विकास, समावेश और हर वर्ग को राहत
  • गरीबों, युवाओं और महिलाओं के लिए समावेशी नीति

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को मंजूरी दी। बजट भाषण में वित्तमंत्री ने इसे तीन प्रमुख ‘कर्तव्यों’-आर्थिक विकास, जनआकांक्षाओं की पूर्ति और सबका साथ, सबका विकास, के इर्द-गिर्द तैयार बताया।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह बजट गरीब, हाशिए पर पड़े लोगों, अनुसूचित जाति-जनजाति, युवाओं और महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाला है। उन्होंने बताया कि सरकार का संकल्प है कि सभी नागरिकों को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक समान रूप से पहुंच मिले। वित्तमंत्री ने कहा, ‘आर्थिक विकास को तेज और टिकाऊ बनाना, जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना और सबका साथ-सबका विकास सुनिश्चित करना इस बजट के मूल उद्देश्य हैं।’ आर्थिक विकास को तेज करने के लिए सरकार ने सात रणनीतिक क्षेत्रों में सुधार करने का प्रस्ताव रखा है।

इनमें घरेलू विनिर्माण को बढ़ाना, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना, अग्रणी एमएसएमई तैयार करना, बुनियादी ढांचा बढ़ावा देना, दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना और शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास शामिल है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह कदम वैश्विक बाजारों के साथ गहरे जुड़ाव और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े ऐलान किए गए हैं। देश में मधुमेह, कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों को देखते हुए अगले पांच साल में फार्मा और बायो-टेक सेक्टर के विकास के लिए 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इसके तहत जांच, शुरूआती इलाज और टीका निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा। तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनपीईआरएस) स्थापित होंगे, जो उच्च गुणवत्ता वाली कौशल प्रशिक्षण और उन्नत लैब सुविधाएं मुहैया कराएंगे।मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी वित्त मंत्री ने बड़ी घोषणाएं की हैं। निमहंस 2.0 के निर्माण के साथ उत्तर भारत में दो मानसिक स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। इसके अलावा पांच रीजनल मेडिकल टूरिज्म हब स्थापित किए जाएंगे, जो डॉक्टरों, नर्सों और अन्य चिकित्सीय कर्मियों को रोजगार प्रदान करेंगे। आयुर्वेद क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए तीन नए अखिल भारतीय संस्थान स्थापित होंगे।

एमएसएमई और वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड, टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल जैसी योजनाओं की घोषणा की गई। इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा और खादी, हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।परिवहन और बुनियादी ढांचे में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं।

मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शहरों के बीच ह्यग्रोथ कनेक्टरह्ण के रूप में काम करेंगे। इनसे औद्योगिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और धार्मिक क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी।शिक्षा, कौशल और रोजगार के क्षेत्र में ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता’ नामक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह सेवा क्षेत्र में वृद्धि, रोजगार और निर्यात संभावनाओं को अधिकतम करने के उपाय सुझाएगी और उभरती तकनीक, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव का आकलन करेगी।

कर सुधारों में आम लोगों को राहत देने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर लगने वाले स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) की दर 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी की गई है। आयकर रिटर्न संशोधन की अंतिम तिथि आईटीआर-1 और आईटीआर-2 के लिए 31 जुलाई, और गैर-लेखा परीक्षण व्यापार मामलों के लिए 31 अगस्त कर दी गई है। संपत्ति बेचने वाले एनआरआई पर टीडीएस नियम बदले गए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के मार्ग पर सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सार्वभौमिक सेवाओं को बढ़ाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। इन कदमों से भारत ने लगभग 7 फीसदी की उच्च विकास दर हासिल की है और गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

फाइनेंशियल अनुशासन बनाए रखते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बजट में शराब, बीड़ी, जूते, कपड़ा और बैटरी सस्ती करने के साथ-साथ नॉन-कॉम्यूनिकेबल डिजीज की दवाइयों पर भी कीमतों में कमी की घोषणा की गई है।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह बजट समावेशी विकास, आर्थिक मजबूती और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक, हर क्षेत्र और हर समुदाय भारत की विकास यात्रा में सक्रिय रूप से शामिल हो।

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