नई दिल्ली: पाकिस्तान ने टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मुकाबला खेलने से मना कर दिया है, जो अब उसके लिए एक गंभीर समस्या बनता दिख रहा है। यह मामला अब केवल दो टीमों के बीच का नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के लिए भी एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, आईसीसी इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने की योजना बना रही है, जो संभवतः मंगलवार या बुधवार को होगी। इस बैठक में पाकिस्तान के निर्णय और उससे संबंधित नियमों पर चर्चा की जाएगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
रविवार को पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह घोषणा की कि उनकी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगी। इस निर्णय के बाद क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है। हालांकि, आईसीसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं भेजा है।
सरकारी घोषणा के कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने कहा कि उनकी टीम सरकार के निर्णय का पालन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला क्रिकेट बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और टीम सरकार के निर्देशों के अनुसार चलेगी।
इस मामले में पीसीबी अध्यक्ष और गृह मंत्री मोहसिन नकवी की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पहले नकवी ने पूरे टूर्नामेंट के बहिष्कार की बात की थी, लेकिन अब यह केवल भारत के खिलाफ मैच न खेलने तक सीमित रह गया है।
आईसीसी के सूत्रों के अनुसार, यदि पाकिस्तान 15 फरवरी को भारत के खिलाफ खेलने नहीं आता है, तो उसे वॉकओवर देना होगा। इसका मतलब होगा कि भारत को बिना खेले ही जीत मिल जाएगी और पाकिस्तान को दो महत्वपूर्ण अंक गंवाने पड़ेंगे।
पाकिस्तान को मैदान के बाहर भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आईसीसी पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर रोक लगाने पर विचार कर सकता है। इसके अलावा, पीसीबी को मिलने वाली राशि में भी कटौती की जा सकती है।
भारत-पाकिस्तान मैच न होने से ब्रॉडकास्टर्स को अरबों रुपये का नुकसान हो सकता है। पिछले साल एशिया कप में इन दोनों टीमों के बीच हुए मुकाबलों ने ब्रॉडकास्टर्स को भारी मुनाफा दिया था।
हालांकि, क्रिकेट इतिहास में पहले भी मैच बहिष्कार के उदाहरण मिलते हैं, लेकिन इस बार का मामला अलग है। पहले कभी इतना बड़ा मुकाबला अंतिम समय पर रद्द करने का ऐलान नहीं हुआ था, जिससे यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बहस का कारण बन गया है।