बाप - बेटा गिरोह के सरगना मनोज- माणिक के गिरफ़्तारी बाद ए के 47 की बरामदगी पुलिस के लिए चुनौती!
Tarunmitra February 03, 2026 10:44 PM

पटना, 03 फ़रवरी ( तरूणमित्र ) । अपराधी चाहें कितना भी बड़ा हो उसके गर्दन की नाप पुलिस के हाथों में होती है । अगले सुबह मीडिया व समाजिक संगठनों व राज नेताओं के वाट्सअप पर एक वायरल वीडियो और अनजान नंबरों से कॉल आता है की मेरे पति, मेरे पिता शम्भूकुढा गांव के मनोज सिंह व माणिक सिंह को बेंगलूरू में बिहार के एसटीएफ की टीम घेर लिया है एंकाउंटर करना चाहती है , जान बचा लीजिए ।

कल तक जिस कुख्यात के नाम से लोग ख़ौफ़ में हो जाते थे आज उसका पुरा परिवार जान की गुहार लगा रहा था । वायरल वीडियो में कुख्यात बाप - बेटा की बेचैनी स्पष्ट दिखाई दें रही थी । बेंगलूरु में कुख्यात की गिरफ़्तारी की अधिकारिक पुष्टि एसटीएफ व बिहार पुलिस से अभी नहीं हुई है । कुख्यात मनोज सिंह पर 25 हज़ार का इनाम भी घोषित है और लंबे अरसे से पुलिस तलाश कर रहीं थी । गिरफ़्तारी के डर से बाप - बेटा कांग्रेस शासित राज्य को सेफजोन बना रखा था ।

वर्ष 2017 बाढ़ कोर्ट में दिनदहाड़े क़ैदी गुड्डू सिंह की हत्या गोली मारकर कर दिया गया था । गुड्डू सिंह का सोनू- मोनू सिंह से विवाद था । इस हत्या को अंजाम देने के लिए मनोज सिंह- माणिक सिंह का सहयोग लिया गया था । गुड्डू सिंह के हत्या के बदले मनोज- माणिक को एक बाहुबली ने ए के 47 दिया था । ए के 47 को लेकर उक्त बाहुबली और मनोज सिंह में टेलीफोनिक विवाद का वीडियो वायरल हुआ था । ए के 47 की चर्चा आते ही उसके बरामदगी के लिए पुलिस ने ताबड़तोड़ छापामारी किया था लेकिन सफलता नहीं मिला था । कुख्यात मनोज सिंह के गिरफ़्तारी के बाद ए के 47 बरामदगी का रास्ता आसान हो गया हैं वहीं पुलिस के लिए चुनौती है । अपराध जगत में ऐसा चर्चा हुआ था की उक्त बाहुबली के शान का हथियार ए के 47 ने 8 लाख रूपए देकर वापस ले लिया था लेकिन कुछ इसे अफ़वाह बताते थे । ए के 47 दिखाकर ही वर्चस्व क़ायम करता है ।

पिता- मामू के हत्या के बाद अपराध की दुनिया में रखा कदम

पटना जिला के नौबतपुर थाना क्षेत्र के शम्भूकुढ़ा निवासी कुख्यात मनोज सिंह के पिता रामायण सिंह की हत्या 90 की दशक में गांव में ही हो गया था । रामायण सिंह कुशल किसान के साथ रामायण मंडली गायक थे । मनोज सिंह का मामू भोजपुर के धनुपरा गांव निवासी गणपत चौधरी थे जो सोसलिस्ट के बड़े नेता थे । उनकी हत्या हरेकृष्णा ने गोली मारकर कर दिया था । घर में दो - दो हत्या को नज़दीक से देखने वाला मनोज सिंह अपराध की दुनिया में कदम रख दिया । बाप के हत्या का बदला लेने के बाद मनोज सिंह ने एक - एक कर दुश्मनों को रास्ते से हटाने का काम किया और यह भूल गया की कानून के हाथ बड़े लंबे होता है एक न एक दिन कानून के जद में आना ही है ।

बाप को देखकर बेटा ने भी अपराध के रास्ते को अपनाया

"बाप पर पूत, नसल पर घोड़ा, ज्यादा नहीं तो थोड़ा थोड़ा" यह कहावत कुख्यात माणिक सिंह पर पुरी तरह सटीक बैठता है । घर में अपराध का संचार फल - फूल रहा था । बाप मनोज सिंह का दबदबा, दबंगता देखकर माणिक सिंह ने ही अपराध का रास्ता चुना । नाबालिग अवस्था में ही माणिक सिंह ने पहली हत्या पटना जिला के खगौल स्थित मौर्यबिहार कालोनी निवासी, काजू - मार्बल व्यापारी अरविंद आनंद को गोली मारकर कर दिया था । इसके बाद अपराध के दुनिया में बाप - बेटा गिरोह से मशहूर हो गया । दानापुर कोर्ट में छोटे सरकार नामक कुख्यात अपराधी को मरवा दिया और अपने प्रमुख दुश्मन को हमेशा के लिए हटा दिया ।

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