संसद में पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब (अनपब्लिश्ड) पर रार के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने कहा है कि सरकार के कहने पर मुझे संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है. देश की सुरक्षा पर मुझे बोलने से रोका जा रहा है. राहुल ने कहा कि सदन में सभी सांसदों को बोलने का अधिकार है.
राहुल ने कहा कि नेता विपक्ष को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है. ये हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा है. राहुल ने कहा कि संसद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया हो.
राहुल गांधी की चिट्ठी में क्या?ओम बिरला को लिखी चिट्ठी में राहुल गांधी ने कहा कि कल संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान, आपने मुझे उस मैगजीन को ऑथेंटिकेट करने के लिए कहा था, जिसका मैं जिक्र करना चाहता था. आज अपना भाषण फिर से शुरू करते समय मैंने उस डॉक्यूमेंट को ऑथेंटिकेट कर दिया. संसदीय नियमों और पुरानी परंपराओं के मुताबिक, अगर कोई सदस्य सदन में किसी दस्तावेज का हवाला देना चाहता है, तो उसे उसकी सत्यता की जिम्मेदारी लेनी होती है. एक बार यह जिम्मेदारी लेने के बाद, स्पीकर उसे वह दस्तावेज पढ़ने या उसका जिक्र करने की अनुमति देते हैं. इसके बाद उस मुद्दे पर जवाब देना सरकार का काम है, न कि स्पीकर का.