भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा के एक दिन बाद (3 फरवरी 2026) को ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि इस डील से संबंधित सटीक जानकारी अभी भी कागजी रूप में तैयार किया जा रहा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि ट्रेड डील के तहत क्या-क्या होने हैं ये तय हो चुका है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है. उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बयान का समर्थन किया.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ट्रंप प्रशासन का बयान
सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जैमीसन ग्रीर ने कहा कि हमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बारीकियों के बारे में पता है. उन्होंने कहा कि भारत कृषि उत्पादों के संबंध में कुछ सुरक्षा उपाय बनाए रख रहा है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील की सराहना की. उन्होंने कहा, 'हम जल्द ही दोनों देशों की ओर से एक संयुक्त बयान जारी करेंगे, जिसमें वो सारी जानकारी होगी जिन पर अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएंगे.'
कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की रक्षा होगी: पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि यह समझौता देश के लोगों के लिए काफी अवसर प्रदान करेगा और हमारे संवेदनशील क्षेत्रों, कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह रक्षा करेगा.’ पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता प्लास्टिक, कपड़ा, चमड़ा और जूते, आभूषण, जैविक रसायन, रबड़ उत्पाद, मशीनरी और विमान जैसे भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए काफी अवसर खोलेगा. इनमें से अधिकांश क्षेत्रों पर आयात शुल्क अमेरिकी बाजारों में मौजूदा 50 फीसदी से घटकर जल्द ही 18 फीसदी हो जाएगा.
मंत्री ने कहा कि भारत एक तेजी से विकसित होती और विशाल अर्थव्यवस्था है और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पाद, डेटा सेंटर उपकरण, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन प्रोडक्ट और कच्चे माल जैसी वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है
भारतीय सामानों पर कैसे कम होगा टैरिफ?
भारत ने अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत दी गई छूट की तरह ही कुछ क्षेत्रों में शुल्क रियायतें देने पर सहमति जताई है. समझौते के लागू होने के दिन से ही कुछ क्षेत्रों में आयात शुल्क समाप्त कर दिए जाएंगे, जबकि अन्य क्षेत्रों में इन्हें धीरे-धीरे कम किया जाएगा. कुछ क्षेत्रों में शुल्क घटाए जाएंगे, जबकि अन्य क्षेत्रों में कोटा आधारित रियायतें दी जाएंगी.
भारत ने हमेशा से ही डेयरी, चावल, गेहूं, मीट, मुर्गी पालन, अनाज, आनुवंशिक रूप से प्रोसेस्ड फूड, सोया आटा और मक्का जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अपने व्यापार समझौतों के दायरे से बाहर रखा है.