राजधानी में विकास को बहु-आयामी स्वरूप देने की दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ योजनाएं आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हाल के बयानों और पहलों से संकेत मिलता है कि शहर में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सुरक्षा और झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास जैसे मुद्दों को समग्र दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
सरकारी स्तर पर यह कहा गया है कि विकास को किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय ‘360 डिग्री’ मॉडल के तहत सभी नागरिकों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत सड़क, जल निकासी और परिवहन जैसे आधारभूत ढांचे के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों की सुविधाओं को सुदृढ़ करने, युवाओं के लिए कौशल और रोजगार अवसर बढ़ाने तथा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े उपायों पर काम किया जा रहा है।
दिल्ली में विकास अब किसी एक वर्ग, एक क्षेत्र या एक योजना तक सीमित नहीं है, यह 360 डिग्री विकास है, जो हर नागरिक को साथ लेकर चल रहा है।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) February 6, 2026
बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा से लेकर युवाओं को अवसर, झुग्गी बस्तियों के सम्मान से लेकर व्यापार और… pic.twitter.com/RCQLV0K36T
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती आबादी और बुनियादी जरूरतों के दबाव को देखते हुए एकीकृत योजनाएं आवश्यक हो जाती हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में समन्वित निवेश से ही लंबे समय में शहर की जीवन गुणवत्ता में सुधार संभव है।
साथ ही, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन स्थितियों पर ध्यान देने की बात भी सामने आई है, ताकि विकास का लाभ व्यापक स्तर तक पहुंचे। विश्लेषकों के अनुसार, राजधानी में चल रही इन पहलों का प्रभाव उनके क्रियान्वयन और निगरानी पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि बहु-क्षेत्रीय योजनाएं नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों को किस हद तक बेहतर बना पाती हैं।