पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शिया मुस्लिम नमाज़ियों पर हुए आत्मघाती हमले के बाद कश्मीर के शिया बहुल इलाकों में लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे. इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में स्थित खदीजतुल कुबरा मस्जिद और इमामबाड़ा में शुक्रवार (6 फरवरी 2025) को एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. इस भयानक हमले में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि 170 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह हमला पाकिस्तान की राजधानी में बीते कई वर्षों का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है.
इस घटना के विरोध में जम्मू-कश्मीर के बारामूला, बांदीपोरा और पट्टन जैसे इलाकों में शिया समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी हाथों में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेताओं अयातुल्ला खामेनेई और अयातुल्ला खुमैनी की तस्वीरों वाले पोस्टर लिए हुए थे. उन्होंने पाकिस्तान और इज़राइल के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि निर्दोष लोगों को मारने वालों को उन जगहों पर जाना चाहिए, जहां सच में मुसलमानों पर हमले हो रहे हैं, जैसे फिलिस्तीन, यमन और सीरिया.
किसने ली हमले की जिम्मेदारी?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार अपने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रही है. उन्होंने मोमबत्तियां जलाकर हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई. लोगों ने पाकिस्तान में हो रही सांप्रदायिक हिंसा को तुरंत रोकने की मांग भी की. इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के पाकिस्तान चैप्टर (ISPK) ने ली है. SITE इंटेलिजेंस ग्रुप के अनुसार, संगठन ने कहा कि आत्मघाती हमलावर ने मस्जिद के अंदर शिया नमाज़ियों के बीच जाकर विस्फोट किया, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ.
इस्लामाबाद में सबसे घातक हमला
बताया जा रहा है कि यह हमला साल 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल में हुए बम धमाके के बाद राजधानी में सबसे घातक हमला है. इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और लोग पाकिस्तान सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.