Exclusive: नागरिकता मामले को लेकर सोनिया गांधी की तरफ से कोर्ट में जवाब दाखिल, जानें क्या है पूरा मामला
सुशील कुमार पांडेय February 07, 2026 05:42 PM

बिना नागरिकता हासिल किए मतदाता सूची में कथित जालसाजी कर नाम शामिल कराए जाने के मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल रिवीजन पिटीशन पर राउज एवेन्यू कोर्ट में उनकी तरफ से जवाब दाखिल किया गया है.

कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सोनिया गांधी ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह गलत आधार पर दाखिल की गई है और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है. कोर्ट में दाखिल जवाब में साफ तौर पर कहा गया है कि नागरिकता से जुड़े मामलों का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, जबकि मतदाता सूची से जुड़े विवाद चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

'आरोप केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित'
कांग्रेस नेता की तरफ से कहा गया कि ऐसे मामलों में आपराधिक अदालतों का दखल संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत प्रतिबंधित है. सोनिया गांधी की ओर से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं. शिकायतकर्ता यह तक स्पष्ट नहीं कर पाया कि कौन से दस्तावेज़ कथित रूप से जाली बनाए गए, कब बनाए गए और किसने बनाए. न तो किसी आवेदन की कॉपी लगाई गई और न ही यह बताया गया कि ऐसे किसी दस्तावेज़ को पाने के लिए कोई कानूनी प्रयास किया गया.

कोर्ट को बताया गया कि शिकायत जिन घटनाओं पर आधारित है, वे 1980–83 के दौर की बताई जा रही हैं. इतने लंबे समय बाद न तो विश्वसनीय साक्ष्य मिल सकते हैं और न ही ऐसे मामलों को आगे बढ़ाना कानूनन उचित है. सोनिया गांधी ने कहा कि 40 साल से ज्यादा पुराने आरोपों को उठाना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

जवाब में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने मीडिया रिपोर्ट्स और पुराने अखबारों की कतरनों के आधार पर मामला खड़ा करने की कोशिश की है, जिनका कोई कानूनी महत्व नहीं है. एक दस्तावेज़ पर तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शब्द का इस्तेमाल बताया गया जबकि यह शब्द 1991 के बाद प्रचलन में आया, जिससे उस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर सवाल उठता है.

21 फरवरी को अगली सुनवाई 
इसके अलावा अदालत को यह भी बताया गया कि कानून के अनुसार धारा 175(3) के तहत दायर याचिका के साथ सही ढंग से सत्यापित हलफनामा अनिवार्य होता है, जो इस मामले में मौजूद नहीं है. ऐसे में मजिस्ट्रेट को इस शिकायत पर सुनवाई करने का अधिकार ही नहीं बनता. सोनिया गांधी ने कोर्ट से मांग की कि यह आपराधिक रिविजन याचिका खारिज की जाए, क्योंकि यह न केवल कानून का दुरुपयोग है, बल्कि निराधार और दुर्भावनापूर्ण भी है. राउज एवन्यू कोर्ट 21 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगा.  

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