PC Tips: कई बार हम जल्दबाजी में कंप्यूटर बंद करते समय शटडाउन या रीस्टार्ट में से कोई भी बटन दबा देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी-सी गलती PC की परफॉरमेंस पर बड़ा असर डाल सकती है? सही समय पर सही विकल्प न चुनने से सिस्टम स्लो हो सकता है, हैंग करने लगता है और अपडेट भी ठीक से इंस्टॉल नहीं हो पाते. इसलिए यह समझना जरूरी है कि शटडाउन और रीस्टार्ट में फर्क क्या है और कब कौन-सा बटन दबाना सही रहता है.
जब आप PC को शटडाउन करते हैं तो सिस्टम पूरी तरह बंद हो जाता है. सभी ऐप्स, बैकग्राउंड प्रोसेस और हार्डवेयर कंपोनेंट्स को पावर सप्लाई मिलना बंद हो जाती है. हालांकि आजकल Windows जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम में फास्ट स्टार्टअप फीचर होता है जिसमें PC पूरी तरह फ्रेश स्टार्ट नहीं होता. इसका मतलब यह है कि कुछ सिस्टम फाइल्स अगली बार चालू होने पर पहले जैसी ही रहती हैं जिससे कई बार पुरानी समस्याएं बनी रह सकती हैं.
रीस्टार्ट करने पर PC खुद को पूरी तरह रिफ्रेश करता है. सभी बैकग्राउंड प्रोसेस बंद होते हैं, RAM साफ होती है और सिस्टम फाइल्स नए सिरे से लोड होती हैं. यही वजह है कि जब PC स्लो चल रहा हो, इंटरनेट ठीक से काम न कर रहा हो या कोई सॉफ्टवेयर अटक रहा हो तो सबसे पहले रीस्टार्ट करने की सलाह दी जाती है. यह छोटे-मोटे सॉफ्टवेयर बग्स को तुरंत ठीक कर सकता है.
अगर आप लंबे समय तक PC इस्तेमाल नहीं करने वाले हैं जैसे रात भर या कुछ दिनों के लिए तो शटडाउन करना बेहतर होता है. इससे बिजली की खपत कम होती है और हार्डवेयर को भी आराम मिलता है. लैपटॉप यूजर्स के लिए शटडाउन खासतौर पर तब जरूरी है जब बैटरी कम हो और चार्जिंग का इंतजाम न हो.
Windows अपडेट इंस्टॉल करने के बाद, ड्राइवर अपडेट के समय या सिस्टम में अचानक स्लोनेस आने पर रीस्टार्ट करना सबसे सही कदम होता है. इससे अपडेट पूरी तरह लागू हो जाते हैं और PC फिर से स्मूद काम करने लगता है. हफ्ते में एक-दो बार रीस्टार्ट करने से परफॉरमेंस बेहतर बनी रहती है.
हर बार सिर्फ शटडाउन पर भरोसा करना या महीनों तक रीस्टार्ट न करना PC के लिए नुकसानदायक हो सकता है. बेहतर होगा कि रोजाना के इस्तेमाल में सही स्थिति देखकर फैसला लें. जरूरत पड़ने पर रीस्टार्ट करें और लंबे ब्रेक में शटडाउन का विकल्प चुनें.
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