वित्त वर्ष 2025-26 अब समाप्ति की ओर है और ऐसे में करदाताओं के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वे 31 मार्च 2026 से पहले टैक्स से जुड़े सभी अहम काम पूरे कर लें। अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो बाद में अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और आईटीआर फाइलिंग में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सही समय पर दस्तावेज़ जमा करने और टैक्स प्लानिंग करने से न केवल टैक्स बचाया जा सकता है, बल्कि भविष्य की जटिलताओं से भी राहत मिलती है।
पिछले नियोक्ता से मिली सैलरी का विवरण देंयदि आप सैलरीड कर्मचारी हैं और इस वित्त वर्ष में एक से अधिक कंपनियों में काम कर चुके हैं, तो आपको अपने वर्तमान नियोक्ता को फॉर्म 12B के जरिए पिछले एम्प्लॉयर से मिली सैलरी का पूरा ब्योरा देना चाहिए।
इससे आपकी कुल वार्षिक आय के आधार पर सही टैक्स कटौती हो पाती है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो अलग-अलग नियोक्ता अलग-अलग छूट दे सकते हैं, जिससे कम TDS कटेगा और बाद में आईटीआर फाइल करते समय भारी टैक्स और ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
खर्चों से जुड़े प्रूफ समय पर जमा करेंपुराने टैक्स रिजीम में HRA, LTA और अन्य भत्तों पर टैक्स छूट पाने के लिए खर्चों के प्रमाण नियोक्ता को देना जरूरी होता है।
अगर ये दस्तावेज समय पर जमा नहीं किए गए, तो नियोक्ता इन भत्तों को टैक्सेबल इनकम मानकर टैक्स काट सकता है। हालांकि कर्मचारी बाद में रिटर्न फाइल करते समय छूट का दावा कर सकते हैं, लेकिन समय पर प्रूफ देने से अतिरिक्त टैक्स कटौती से बचा जा सकता है।
बैंक रिकॉर्ड से डिडक्शन की पुष्टि करेंबीमा प्रीमियम, ELSS निवेश, होम लोन EMI या बच्चों की फीस जैसे भुगतान वास्तव में बैंक खाते से कटे हैं या नहीं, इसकी जांच करना बेहद जरूरी है।
कई बार ECS फेल हो जाता है या चेक क्लियर नहीं होता, जिससे सेक्शन 80C और अन्य डिडक्शन का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों में 31 मार्च से पहले वैकल्पिक निवेश या भुगतान करना समझदारी होगी।
एडवांस टैक्स का सही समय पर भुगतान करेंयदि TDS घटाने के बाद आपकी कुल टैक्स देनदारी ₹10,000 से अधिक है, तो आपको एडवांस टैक्स देना अनिवार्य है।
सैलरी के अलावा किराया, ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन से होने वाली आय पर एडवांस टैक्स लागू हो सकता है। यदि पहले की किस्तें छूट गई हों, तब भी 31 मार्च तक भुगतान करने पर इसे एडवांस टैक्स माना जाएगा, जिससे ब्याज का बोझ कम हो सकता है।
PPF और NPS में न्यूनतम निवेश जरूर करेंPPF खाते को सक्रिय बनाए रखने के लिए हर साल कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है। ऐसा न करने पर खाता निष्क्रिय हो सकता है, जिसे दोबारा चालू करने में अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
इसी तरह NPS खाते में भी न्यूनतम योगदान जरूरी होता है, वरना खाता फ्रीज हो सकता है। इसलिए 31 मार्च से पहले न्यूनतम राशि जमा करना न भूलें।
₹1.25 लाख तक का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन बुक करेंलिस्टेड शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट मिलती है।
निवेशक इस सीमा तक मुनाफा बुक करके अपनी टैक्स देनदारी घटा सकते हैं। चाहें तो शेयर बेचकर बाद में दोबारा खरीदने की रणनीति अपनाई जा सकती है, जिससे निवेश भी बना रहेगा और टैक्स प्लानिंग भी हो जाएगी।
समय पर टैक्स प्लानिंग क्यों जरूरी है31 मार्च से पहले ये सभी काम पूरे करने से न सिर्फ टैक्स बचाया जा सकता है, बल्कि आईटीआर फाइलिंग भी आसान और तनाव-मुक्त हो जाती है।
थोड़ी-सी सतर्कता और सही योजना आपको अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और कानूनी परेशानियों से बचा सकती है।