यह पोस्ट मनोज नरवणे ने 15 दिसंबर, 2023 में शेयर की थी। उन्होंने इसमें लिखा था- नमस्ते दोस्तो, मेरी किताब अब उपलब्ध है, बस लिंक पर क्लिक करें... वहीं, पुस्तक के प्रकाशक 'पेंग्विन' ने लिखा- हम विजय दिवस की तैयारी कर रहे हैं, आइए अपने देश के नायकों का सम्मान करने के लिए एक पल निकालें, जिसकी शुरुआत @ManojNaravane से करते हैं, जो 28वें थल सेनाध्यक्ष हैं और जिन्होंने दशकों तक भारत देश की सेवा की है। उनकी कहानी जानने के लिए, अभी प्री-ऑर्डर करें। ALSO READ: राहुल गांधी ने पेंगुइन पर लगाया झूठ का आरोप, बोले— नरवणे की किताब अमेजन पर मौजूद
दरअसल, इस पोस्ट से राहुल गांधी के दावे को भी बल मिलता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे 'फोर स्टार ऑफ डेस्टिनी' को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेंट करना चाहते हैं। दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया था कि राहुल गांधी ऐसी पुस्तक के आधार पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका अभी प्रकाशन ही नहीं हुआ है। ALSO READ: नरवणे की किताब को लेकर दिल्ली पुलिस ने की FIR, क्या राहुल गांधी पर भी कसेगा शिकंजा?
क्या कहा था राहुल गांधी ने?राहुल गांधी ने कहा कि प्रकाशक (पेंगुइन) दावा कर रहा है कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और इसकी कोई भी कॉपी बाजार में नहीं है। राहुल गांधी का तर्क है कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्व सेना प्रमुख पर भरोसा है, वे झूठ नहीं बोलेंगे। ALSO READ: राहुल गांधी बोले — सरकार कह रही ‘Four Stars of Destiny’ है ही नहीं, PM मोदी को संसद में दूंगा नरवणे की किताब
पुस्तक पर क्यों है विवाद?हाल ही में (फरवरी 2026), लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में इस किताब के कथित अंशों का हवाला दिया, जिसके चलते सदन में भारी हंगामा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि किताब में 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद (गलवान घाटी संघर्ष) के दौरान सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और लीक हुए अंशों के अनुसार, किताब में कुछ ऐसे विषयों पर चर्चा की गई है जो सरकार के लिए असहज हो सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जनरल नरवणे ने अग्निपथ योजना की शुरुआत और सेना के शुरुआती रुख पर अपने विचार लिखे हैं। किताब में कथित तौर पर 31 अगस्त 2020 की उस रात का वर्णन है, जब गलवान में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हो गए थे। विपक्ष का दावा है कि नरवणे ने पुस्तक में नेतृत्व की 'अनिर्णय की स्थिति' का संकेत दिया है।
हाल ही में इस किताब की एक पीडीएफ कॉपी और कुछ अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। प्रकाशक 'पेंगुइन' ने भी स्पष्ट किया है कि किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है और इसका कोई भी सर्कुलेशन अवैध है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala