पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं पर जेब से होने वाले खर्च में काफी कमी आई: जेपी नड्डा
Samachar Nama Hindi February 14, 2026 10:43 PM

नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को देहरादून के स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्नातक छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने पर बधाई दी।

जेपी नड्डा ने दीक्षांत समारोह को विशेष और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्नातकों से चिकित्सा पेशे के सर्वोच्च आदर्शों को बनाए रखने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और अपने कौशल और ज्ञान को मानवता की सेवा में समर्पित करने का आग्रह किया।

पिछले ग्यारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई परिवर्तनकारी प्रगति पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है, जिससे पूरे देश में उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि संस्थागत प्रसवों की दर बढ़कर लगभग 89 प्रतिशत हो गई है, जो मजबूत मातृ स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) एक दशक पहले प्रति लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर 88 हो गई है, जबकि शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति हजार जीवित जन्मों पर 39 से घटकर 27 हो गई है, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुमानों का हवाला देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में वैश्विक औसत की तुलना में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में काफी तेजी से गिरावट दर्ज की है, जो लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों और स्वास्थ्य सेवा तक विस्तारित पहुंच के प्रभाव को रेखांकित करता है। तपेदिक नियंत्रण प्रयासों का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत ने तपेदिक की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है, जो वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन है। सतत जन स्वास्थ्य उपायों और समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से औसत कमी आई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भारत के ऐतिहासिक कोविड-19 टीकाकरण अभियान पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत एहतियाती और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक टीके देशभर में लगाए गए हैं, जो भारत की जन स्वास्थ्य प्रणाली की व्यापकता, लचीलापन और दक्षता को दर्शाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में वित्तीय सुरक्षा पर जोर देते हुए, जेपी नड्डा ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि इस योजना से अब लगभग 62 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है, जो भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को कवर करता है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं और स्वतंत्र मूल्यांकनों से प्राप्त प्रमाणों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि एबी-पीएमजेएवाई ने समय पर कैंसर उपचार तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार किया है और देश भर में पात्र लाभार्थियों के लिए वित्तीय सुरक्षा को मजबूत किया है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं पर जेब से होने वाले खर्च में काफी कमी आई है, जिससे परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है। वैश्विक आबादी के लगभग छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद, भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा रिपोर्ट किए गए रुझानों के अनुरूप निरंतर वेक्टर-जनित रोग नियंत्रण प्रयासों के माध्यम से मलेरिया की घटनाओं और मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नागरिकों के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु के रूप में देशभर में 18 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर चालू किए जा चुके हैं। इनमें से 50,000 केंद्रों को पहले ही प्रमाणित किया जा चुका है।

--आईएएनएस

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