दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों और संस्थानों को एकीकृत कर एक आधुनिक और स्वायत्त मेडिकल संस्थान बनाने की योजना का ऐलान किया है. इस पहल से मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा इसके साथ ही MBBS और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) सीटों में भी बढ़ोतरी होगी.
सरकार का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग कर डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और मेडिकल शिक्षा को नई दिशा देना है, जिससे दिल्ली देश में स्वास्थ्य और रिसर्च का प्रमुख केंद्र बन सके.
अस्पतालों के एकीकरण से बनेगा मजबूत हेल्थ सिस्टमदिल्ली की सरकार गुरु तेग बहादुर अस्पताल, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को मिलाकर एक बड़ा संस्थान बनाने की तैयारी है. यह मॉडल एम्स की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. इसके अलावा, इहबास को भी NIMHANS-2 के रूप में विकसित करने की योजना है. इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी.
फैकल्टी के बेहतर उपयोग से बढ़ेंगी PG सीटेंसरकार का मुख्य फोकस PG सीटों की संख्या बढ़ाना है. अभी अलग-अलग संस्थानों में फैकल्टी बंटी हुई है, जिससे उनकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता. एकीकरण के बाद प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर ज्यादा PG सीटें बनाई जा सकेंगी.
इन विषयों में होगी सीटों की बड़ी बढ़ोतरीएकीकरण के बाद रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और एनेस्थीसिया जैसे विभागों में सीटों की संख्या तेजी से बढ़ेगी. अनुमान है कि रेडियोलॉजी में करीब 22, पैथोलॉजी में 26 और एनेस्थीसिया में लगभग 48 सीटें हो सकती हैं. खाली पदों को भरने से भी यह संख्या और बढ़ेगी.
नए विभागों में शुरू होंगे PG कोर्सकुछ विभागों में अभी PG सीटें नहीं हैं. एकीकरण के बाद इन विभागों में नई नियुक्तियां कर कोर्स शुरू किए जाएंगे. कैंसर इंस्टीट्यूट में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी और न्यूक्लियर मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में करीब 26 सीटें जुड़ सकती हैं. वहीं राजीव गांधी अस्पताल में कार्डियक सर्जरी में भी नई सीटें बढ़ेंगी.
MBBS सीटों का भी होगा विस्तारबढ़ती सुविधाओं, मरीजों और फैकल्टी के साथ MBBS सीटें बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा. इसके लिए नए हॉस्टल, लैब और लेक्चर थिएटर बनाए जाएंगे जिससे कि स्टूडेंट्स को एक बेहतर माहौल मिलेगा. सरकार का लक्ष्य दिल्ली को मेडिकल शिक्षा और रिसर्च का नेशनल सेंटर बनाना है.
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