चांदी 45% और सोना 20% गिरा, फिर भी क्यों नहीं घबरा रहे समझदार निवेशक?
TV9 Bharatvarsh March 23, 2026 01:45 AM

इस समय चांदी की कीमत करीब 67 डॉलर है, जो इसके ऑल टाइम हाई 121 डॉलर से करीब 45% नीचे है. वहीं सोना भी गिरकर करीब 4,488 डॉलर पर आ गया है, जो अपने पीक 5,602 डॉलर से लगभग 20% कम है. हालिया गिरावट ने कई निवेशकों को हैरान कर दिया है. खासकर वे लोग जो ऊंचे दाम पर निवेश करने आए थे, अब उनका पोर्टफोलियो घाटे में चला गया है. लेकिन सवाल है ऐसा क्यों हुआ? दरअसल, 2025 में सोना करीब 65% चढ़ा था और 2023 के बाद हर साल 20% से ज्यादा रिटर्न दे रहा था.

सबसे बड़ी गलती बिना प्लान के निवेश

अगर अभी आपको नुकसान हो रहा है, तो इसकी सबसे बड़ी वजह हो सकती है कि आपने बिना प्लान के निवेश किया. खासकर रिटेल निवेशक अक्सर भावनाओं में आकर या छूट न जाए (FOMO) के डर से खरीदारी कर लेते हैं. भारत में भी इसका असर साफ दिखा. दिसंबर 2025 में गोल्ड ETF में 11,646 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो नवंबर के 3,741 करोड़ रुपये से तीन गुना ज्यादा था. जनवरी 2026 में तो पहली बार ऐसा हुआ जब भारतीय निवेशकों ने इक्विटी फंड्स से ज्यादा पैसा गोल्ड ETF में लगाया.

गोल्ड ETF क्यों बेहतर हैं?

यह अच्छी बात है कि लोग गोल्ड ETF में निवेश कर रहे हैं. यह फिजिकल गोल्ड (जैसे ज्वेलरी या सिक्के) से बेहतर विकल्प है, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और चोरी का खतरा नहीं होता. साथ ही, ETF की कीमतें सोने के असली दाम के ज्यादा करीब रहती हैं.

सही तरीका एसेट एलोकेशन

लंबे समय में अच्छा रिटर्न पाने के लिए सबसे जरूरी है एसेट एलोकेशन, यानी अपने निवेश को अलग-अलग जगह बांटना. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो का 1015% हिस्सा सोने में होना चाहिए. जब सोने के दाम गिरते हैं, तो यह खरीदने का मौका होता है. और जब दाम बहुत बढ़ जाते हैं, तो थोड़ा मुनाफा निकालकर बैलेंस बनाए रखना चाहिए.

क्या RBI भी यही कर रहा है?

आंकड़े बताते हैं कि RBI ने 2022 से लगातार सोना खरीदा, लेकिन 2025 में खरीद काफी कम कर दी. इसकी वजह यह हो सकती है कि उसने अपने टारगेट एलोकेशन को हासिल कर लिया है. 2025 तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी करीब 16% तक पहुंच गई थी.

आगे क्या रहेगा ट्रेंड?

सोना आमतौर पर तब चमकता है जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है जैसे जंग, आर्थिक कमजोरी या करेंसी की गिरावट. फिलहाल सोने की दिशा काफी हद तक तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और महंगाई पर निर्भर करेगी. अगर डॉलर मजबूत होता है और ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने पर दबाव रह सकता है.

निवेशकों के लिए सीख

अगर आपको इन सब फैक्टर्स को ट्रैक करना मुश्किल लगता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. बस एक सही प्लान बनाएं और धीरे-धीरे, नियमित निवेश करें जैसे SIP. अगर आप अनुशासन के साथ निवेश करेंगे, तो बाजार की गिरावट या उतार-चढ़ाव आपको ज्यादा परेशान नहीं करेंगे और आप अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सकेंगे.

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