मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार अलर्ट मोड में, प्रधानमंत्री मोदी ने की हाईलेवल मीटिंग, ऊर्जा आपूर्ति समेत इन मुद्दों पर हुई चर्चा
Webdunia Hindi March 23, 2026 04:42 AM

- उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा, पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की गई

- बैठक का मुख्य उद्देश्य गैस और तेल की आपूर्ति को सही तरीके से बनाए रखना

- देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर

Amidst Middle East crisis PM Modi held high level meeting : मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार अलर्ट मोड में है। दुनियाभर में चल रही गैस और तेल की कमी से निजात पाने और तेल के स्टॉक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने अधिकारिक आवास पर एक हाईलेवल बैठक की। खबरों के अनुसार, उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा, पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की गई। देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में गैस और तेल की आपूर्ति को सही तरीके से बनाए रखना रहा। उच्चस्तरीय बैठक के दौरान सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही

मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार अलर्ट मोड में है। दुनियाभर में चल रही गैस और तेल की कमी से निजात पाने और तेल के स्टॉक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने अधिकारिक आवास पर एक हाईलेवल बैठक की। उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा, पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की गई। देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में गैस और तेल की आपूर्ति को सही तरीके से बनाए रखना रहा।

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करीब साढ़े 3 घंटे चली उच्चस्तरीय बैठक

मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह इमरजेंसी बैठक करीब साढ़े तीन घंटे चली। इस हाईलेवल मीटिंग में सीनियर कैबिनेट मंत्रियों के साथ कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई चेन की समीक्षा की गई। सरकार का मुख्य फोकस युद्ध के बीच देश में ईंधन और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। बैठक का मुख्य उद्देश्य देशभर में निर्बाध आपूर्ति और कुशल वितरण सुनिश्चित करना है तथा सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है।

पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर नजर

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच सरकार की ओर से पहले से तैयारी की जा रही है, जिससे इसका असर देश पर किसी भी तरह से न पड़े। सरकार का मकसद है कि पेट्रोलियम, कच्चे तेल, बिजली और खाद (फर्टिलाइजर) जैसे जरूरी क्षेत्रों में सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा न पड़े। इसके साथ ही देश में सामान की ढुलाई और वितरण सही तरीके से हो, इस पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के मद्देनज़र, पेट्रोलियम, कच्चा तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों से जुड़ी स्थिति की समीक्षा की।

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उपभोक्ता और उद्योग के हितों की रक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री ने पूरे देश में निर्बाध आपूर्ति करने के निर्देश दिए और लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रिब्यूशन पर जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा मिडिल ईस्ट संकट के बीच उपभोक्ता और उद्योग के हितों की रक्षा के लिए ग्लोबल डेवलपमेंट पर लगातार नजर रखना प्राथमिकता है। ईरान, इसराइल और अमेरिका के बीच लंबे खिंचते जा रहे युद्ध को देखते हुए भारत सरकार अब और सतर्कता बरतती नजर आ रही है।

आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो

पश्चिम एशिया के हालात का असर धीरे-धीरे यहां बाजार से लेकर आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ने की आशंका है। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने सख्त निर्देश दिए कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें ताकि आम जनता को कम से कम असुविधा हो।

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कालाबाजारी और जमाखोरी पर कसें शिकंजा

केमिकल, फार्मास्युटिकल और पेट्रोकेमिकल जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के लिए कच्चे माल के आयात के नए और सुरक्षित स्रोत तलाशे जाएंगे। राज्यों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि महत्वपूर्ण वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो सके।

अब तक कई नेताओं से बात कर चुके हैं PM मोदी

प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया के कई नेताओं से बात की है. संघर्ष शुरू होने के बाद से मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजराइल और ईरान के नेताओं से टेलीफोन पर बातचीत की है।

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उच्चस्तरीय बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?

इस उच्चस्तरीय बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल रहे। बैठक में इसके अलावा एनएसए अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी मौजूद रहे।

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इस दिन हुई थी युद्ध की शुरुआत

अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इसराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है, जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया।
Edited By : Chetan Gour

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