इंटरव्यू: शिक्षा के लिए 'ऑनलाइन मोड' को उपयुक्त नहीं मानते पूना कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद
Navjivan Hindi March 23, 2026 09:43 PM
कौन हैं डॉक्टर अबरार अहमद:

डॉक्टर अबरार अहमद का संबंध उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ से है। उनका जन्म 10 अप्रैल 1984 को इसाढ़ा नामक गांव में हुआ। पिता का नाम बिस्मिल्लाह और माता का नाम सितारुन्निसा है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्रसिद्ध मदरसा ‘मदरसतुल इस्लाह’ सरायमीर से हुई। बीए की डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ से और बीएड की डिग्री जामिया मिलिया इस्लामिया से प्राप्त की। इसके बाद भारत की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) का रुख किया, जहां से उन्होंने एमए, एमफिल और पीएचडी की डिग्रियां हासिल कीं। जून 2016 से ‘पूना कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स’, पुणे के उर्दू विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। यह कॉलेज सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से संबद्ध है। अबरार अहमद के अनेक शोध एवं आलोचनात्मक लेख उर्दू के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। इंतिज़ार हुसैन के जीवन-वृत्त एवं साहित्यिक विवरण और कहानियों पर उनकी एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक पुस्तक ‘इंतिज़ार हुसैन की अफसाना निगारी’ दिल्ली से 2020 में प्रकाशित होकर सामने आ चुकी है। उन्हें बाल साहित्य से भी विशेष लगाव है। बच्चों की दर्जनों कहानियां मासिक ‘उमंग’, ‘उर्दू दुनिया’ और ‘बच्चों की दुनिया’ में प्रकाशित होकर सराहना प्राप्त कर चुकी हैं।

सावित्रीबाई फुले कॉलेज का संक्षिप्त इतिहास बताएं, इस कॉलेज में उर्दू का विभाग कितना सक्रिय है?

‘पूना कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स’ की स्थापना 1970 में हुई और प्रारंभिक दिनों से ही ‘उर्दू विभाग’ सक्रिय है। उर्दू विभाग में पीजी स्तर तक और फारसी व अरबी में यूजी स्तर तक शिक्षा दी जाती है। दरअसल उर्दू, फारसी व अरबी तीनों भाषाओं का यह संयुक्त विभाग है, जिसे ‘उर्दू, फारसी व अरबी विभाग’ कहा जाता है। यह विभाग पुणे शहर का एकमात्र विभाग है जहां फारसी को विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। इस विभाग को यह गौरव प्राप्त है कि इसमें अध्यापक वर्ग देश के सर्वोच्च विश्वविद्यालयों, जैसे जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे हैं।

उर्दू विभाग में छात्र-छात्राओं की संख्या कितनी है और उर्दू के प्रति उनका रुझान कैसा है?

वर्तमान में बीए और एमए मिलाकर उर्दू विभाग में लगभग 350 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इनमें छात्राओं की संख्या लगभग 70 प्रतिशत होगी, जिससे अंदाजा होता है कि लड़कियां शिक्षा प्राप्त करने में काफी आगे हैं। जहां तक उर्दू के प्रति उनके रुझान का प्रश्न है, छात्र-छात्राएं सभी गंभीर नजर आते हैं। इसका कारण यह है कि विभाग उन्हें कई तरह की गतिविधियों में व्यस्त रखता है। पूना कॉलेज का उर्दू विभाग राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर सेमिनार, वर्कशॉप, कॉन्फ्रेंस और पाठ्य एवं सह-पाठ्य गतिविधियां निरंतर आयोजित करता रहता है, जो छात्र-छात्राओं को मेधावी बनाता है और उनके अंदर मौजूद खूबियों को निखारता है। बच्चों की भाषण, लेखन, रचनात्मक और साहित्यिक क्षमताओं को विकसित करने के लिए उर्दू विभाग में ‘अंजुमन बज़्म-ए-अदब’ भी है, जिसके तहत हर महीने साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उर्दू के छात्र-छात्राएं अक्सर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के भाषण एवं लेखन प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं और पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त करते हैं। आप कह सकते हैं कि पूना कॉलेज का उर्दू विभाग बेहद सक्रिय और गतिशील है।

आपने कोरोना का दौर देखा है, जब कक्षाएं ‘ऑनलाइन’ ली जा रही थीं। इस महामारी ने शिक्षण क्षेत्र और छात्रों पर क्या प्रभाव डाला?

कोरोना के दौरान शिक्षक और छात्र दोनों ही एक मानसिक और मनोवैज्ञानिक पीड़ा से गुजर रहे थे। ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देना शिक्षकों के लिए एक चुनौती था, लेकिन उन्होंने कठिन परिस्थितियों को समझा और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्वयं भी मेहनत की और छात्रों का भी हौसला टूटने नहीं दिया। शुरुआत में ऑनलाइन कक्षाएं अत्यंत धैर्य की परीक्षा लेने वाली थीं, क्योंकि कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था। ऑनलाइन शिक्षण में हमें कई बार ऐसा अनुभव हुआ कि स्क्रीन पर बच्चे का नाम तो है, लेकिन वास्तव में वे मौजूद ही नहीं थे। यानी छात्र लॉग-इन करने के बाद गायब हो जाते थे। जब उनसे कोई सवाल किया जाता तो उसका तुरंत कोई उत्तर नहीं मिलता था। बच्चे अक्सर कमजोर नेटवर्क का बहाना बना कर अपने फोन को ‘म्यूट’ कर देते थे। इससे यही निष्कर्ष निकला कि शिक्षा के लिए जिस प्रकार की एकाग्रता चाहिए, वह ऑनलाइन मोड में संभव नहीं है। विशेष रूप से उन छात्रों के लिए, जो मोबाइल हाथ में होने पर अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रम देखने में व्यस्त हो जाते हैं। हालांकि शिक्षा के प्रति गंभीर छात्र-छात्राओं ने इस कठिन दौर में भी अपना समय व्यर्थ नहीं किया और ऑनलाइन कक्षाओं से लाभ उठाया।

सावित्रीबाई फुले कॉलेज में आप पिछले 9 वर्षों से शिक्षण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस दौरान आपको कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ा होगा। संक्षेप में कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं के बारे में बताएं।

पूना कॉलेज में तकनीकी रूप से तो किसी प्रकार की समस्या सामने नहीं आई, लेकिन मुझे शिक्षा का पारंपरिक तरीका पसंद नहीं है। यही कारण है कि मैं अपने छात्रों को कुछ अलग तरीके से शिक्षा देना पसंद करता हूं। दरअसल भारत के अधिकांश विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पारंपरिक शिक्षण हो रहा है, जहां शिक्षक कक्षा में आते हैं, पाठ्यक्रम पूरा करते हैं, बच्चों को नोट्स लिखवाते हैं, और बस यही उनकी जिम्मेदारी होती है। इस तरह बच्चे परीक्षा में अच्छे अंक जरूर प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन उनकी क्षमताओं में कोई विशेष वृद्धि नहीं होती है। मैंने इसके विपरीत बच्चों की क्षमताओं को विकसित करने के लिए कक्षा में ही कहानियों का विश्लेषण, पुस्तकों पर टिप्पणी और एक ही विषय पर अनेक लेखों को पढ़कर एक नया लेख लिखने का अभ्यास कराया। इससे छात्र-छात्राओं को पर्याप्त लाभ हुआ। उनके अंदर एक नई सोच और दृष्टि उत्पन्न हुई, जिसने उनकी लेखन क्षमता को निखारा।

आपने कुछ पाठ्य पुस्तकें भी तैयार की हैं, उनसे संबंधित कुछ बताएं। ‘नवजीवन’ के पाठकों को अपनी साहित्यिक रुचियों से भी अवगत कराएं।

मेरा सौभाग्य है कि मुझे विश्वविद्यालयों के एमए और बीए स्तर की पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने का अवसर मिला। यशवंतराव चव्हाण ओपन यूनिवर्सिटी, नासिक (महाराष्ट्र) के एमए उर्दू की पुस्तक ‘महाराष्ट्र में उर्दू नज़्म’ मैंने तैयार की है, जिसे छात्रों और शिक्षकों के साथ-साथ आम पाठक ने भी बहुत पसंद किया। इसी तरह ‘इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी’ (इग्नू, नई दिल्ली) के एमए उर्दू के 2 यूनिट भी मेरे प्रयासों का परिणाम हैं। एक ‘कुर्रतुल ऐन हैदर का रिपोर्ताज ‘दकन सा नहीं ठार संसार में’ का विशेष अध्ययन’ और दूसरा शफीक फातिमा शोरा की नज़्मों का विश्लेषण। जहां तक मेरी साहित्यिक रुचियों का सवाल है, कहानी लेखन से मुझे बेहद लगाव है। विशेष रूप से मैं बच्चों के लिए कहानियां लिखता रहता हूं, जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। निकट भविष्य में मेरा कहानी संग्रह भी प्रकाशित होने वाला है।

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.