अर्थजगतः रुपया 93.88 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा और होर्मुज पार कर भारत रवाना हुए LPG लदे जहाज
Navjivan Hindi March 25, 2026 12:44 AM
रुपया 93.88 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

भारतीय रुपया मंगलवार को 35 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 93.88 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर पहुंच गया। प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती और वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण निवेशकों में चिंता का माहौल रहने से घरेलू मुद्रा में यह गिरावट आई।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट को लेकर अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों की निकासी ने भी रुपये पर दबाव डाला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.66 पर खुला और पूरे सत्र के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव बना रहा। अंत में यह 93.88 (अस्थायी) पर रहा, जो पिछले बंद स्तर से 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर को पार कर गया था, हालांकि बाद में यह 93.53 पर स्थिर बंद हुआ।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, "लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की निकासी से रुपये पर दबाव बना हुआ है। मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण उभरते बाजारों की मुद्राएं कमजोर बनी हुई हैं और इस महीने रुपये में लगभग 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। बुधवार के लिए रुपये का दायरा 93.65 से 94.25 के बीच रहने की उम्मीद है।"

होर्मुज पार कर भारत रवाना हुए एलपीजी लदे दो जहाज

केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि एलपीजी से भरे दो जहाज - पाइन गैस और जग वसंत - सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और भारत की ओर आ रहे हैं। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पाइन गैस जहाज 27 मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पहुंचेगा, जिसमें 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी है। जबकि, जग वसंत जहाज 26 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचेगा, जिसमें 47,600 मीट्रिक टन एलपीजी लोड है। इसके अलावा, 20 भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं।

इससे पहले, जहाज ट्रैकिंग डेटा में दिखाया गया था कि दोनों जहाजों को सुरक्षित रास्ते की मंजूरी मिलने के बाद वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में आमतौर पर करीब 14 घंटे का समय लगता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे यह अहम समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है। जग वसंत ने कुवैत से एलपीजी लोड की थी, जबकि पाइन गैस ने यूएई के रुवैस से अपना कार्गो लिया था। तनाव के कारण ये जहाज पहले फंसे हुए थे, लेकिन अब इन्हें आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई है। इस महीने की शुरुआत में भी दो अन्य भारतीय जहाज इसी रास्ते से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।

ईरान युद्ध से मराठवाड़ा से हल्दी का निर्यात रुका, घरेलू बाज़ार में कीमतें गिरीं

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके से हल्दी का निर्यात रुक गया है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें 16,500 रुपये से गिरकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं। शिवसेना के एमएलसी हेमंत पाटिल ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली हल्दी खाड़ी और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है, लेकिन पिछले महीने शुरू हुए युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह से रुक गया है। हल्दी एक नकदी फसल है, जिसकी खेती हिंगोली ज़िले में लगभग दो लाख एकड़ ज़मीन पर की जाती है। यहां की 'वासमत' किस्म को 2024 में 'भौगोलिक पहचान' (जीआई) का दर्जा भी मिला है।

पाटिल ने बताया कि हिंगोली और आसपास के इलाकों से हल्दी के कंटेनर प्रसंस्करण के बाद तमिलनाडु और केरल के रास्ते देश से बाहर भेजे जाते हैं। पाटिल हिंगोली में स्थित 'बालासाहेब ठाकरे हल्दी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र' के प्रमुख भी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हिंगोली, नांदेड़, वर्धा, परभणी, यवतमाल और वाशिम मराठवाड़ा के प्रमुख हल्दी उत्पादक ज़िले हैं। इन ज़िलों में हल्दी की कुल पैदावार लगभग 25 लाख टन होती है। अकेले हिंगोली ज़िले में ही हल्दी की खेती लगभग दो लाख हेक्टेयर ज़मीन पर की जाती है।’’

हिंगोली के एक हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि ईरान युद्ध के कारण न केवल हल्दी का निर्यात पूरी तरह से रुक गया है, बल्कि घरेलू बाज़ार में भी इसकी कीमतों पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध शुरू होने से पहले हल्दी 16,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही थी। अब इसकी कीमत गिरकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है। अगर युद्ध जारी रहा, तो कीमतें और भी नीचे गिर सकती हैं।’’ वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 34 करोड़ 15.4 लाख डॉलर मूल्य की हल्दी का निर्यात किया, जिसमें से अकेले महाराष्ट्र का योगदान 15 करोड़ 53.5 लाख डॉलर रहा। भारत से हल्दी का निर्यात बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, मलेशिया और मोरक्को जैसे देशों में किया गया।

शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 1,372 अंक चढ़कर बंद

सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली और घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स 1.5 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए। ऑटो और बैंक शेयरों ने बाजार को समर्थन दिया, जिससे दोनों प्रमुख बेंचमार्क अपने दिन के उच्चतम स्तर के करीब बंद हुए। दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों के बीच अमेरिका-ईरान युद्ध में तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों में जोखिम भावना में सुधार हुआ। बाजार बंद होने के समय एनएसई निफ्टी50 399.75 अंक या 1.78 प्रतिशत बढ़कर 22,912.40 पर था, तो वहीं बीएसई सेंसेक्स 1.89 प्रतिशत या 1,372.06 अंकों की बढ़त के साथ 74,068.45 पर था।

इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 74,212.47 पर खुलकर एक समय 74,489.39 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 22,878.45 पर खुलकर एक समय 23,057.30 को टच कर गया था। व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप में जहां 2.60 प्रतिशत की तेजी आई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.63 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो सेक्टर में 2.43 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं निफ्टी मीडिया (3.45 प्रतिशत की तेजी) और निफ्टी बैंक सेक्टर (2.27 प्रतिशत की तेजी) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।

इसके अलावा, निफ्टी आईटी में 1.72 प्रतिशत तो निफ्टी एफएमसीजी में 1.25 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी50 में इंडिगो और एलएंडटी के शेयरों में सबसे ज्यादा क्रमशः 5.49 प्रतिशत और 5.17 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई। इसके बाद बजाज फाइनेंस, इटरनल, एशियन पेंट्स और अपोलो हॉस्पिटल के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली, जबकि कोल इंडिया, पावरग्रिड, सन फार्मा और सिप्ला के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में 7.74 लाख करोड़ रुपए की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह पहले (सोमवार) के 415.11 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 422.85 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों को करीब 8 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।

जेप्टो ने शुरू की 'पे लेटर' सुविधा; अब बिना ओटीपी के कर सकेंगे भुगतान

सामान की फटाफट आपूर्ति करने वाले मंच जेप्टो ने मंगलवार को अपने ऐप पर 'पे लेटर' (बाद में भुगतान) और ताजा सब्जियों की असली तस्वीरें देखने जैसी कई नई सुविधाएं शुरू की हैं। कंपनी अब अपना ध्यान केवल '10 मिनट में डिलिवरी' से हटाकर ग्राहकों की जरूरतों और सुविधा पर केंद्रित कर रही है। कंपनी का कहना है कि अब मुकाबला केवल तेजी से सामान पहुंचाने का नहीं, बल्कि ग्राहकों की रोजमर्रा की खरीदारी को आसान और स्मार्ट बनाने का है।

इस नई सुविधा के तहत ग्राहकों को 15 दिन का 'ब्याज-मुक्त' समय मिलेगा। यानी ग्राहक सामान आज मंगा सकते हैं और उसका भुगतान 15 दिन बाद कर सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से छोटे और बार-बार होने वाले ऑर्डर के लिए बनाई गई है। इसमें भुगतान के लिए किसी ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। कंपनी के अनुसार, इसके जरिये 10,000 रुपये तक की तत्काल क्रेडिट सीमा (उधार) दी जा रही है।

जेप्टो के ऐप पर पर अब ग्राहक सब्जियों और फलों की केवल पुरानी कैटलॉग तस्वीरें नहीं, बल्कि अपने नजदीकी स्टोर में मौजूद ताजा सामान की असली और ताजी तस्वीरें देख सकेंगे। इससे ऑनलाइन खरीदारी में भरोसे की कमी दूर होगी। अक्सर ऑर्डर देने के बाद याद आता है कि कुछ छूट गया है। अब जेप्टो ग्राहकों को ऑर्डर देने के कुछ समय बाद तक उसमें नए सामान जोड़ने की सुविधा भी देगी।

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