ट्रंप की अगुवाई में चला शेयर बाजार, मिनटों में निवेशकों ने कमाए 6 लाख करोड़
TV9 Bharatvarsh March 25, 2026 02:43 PM

भारतीय शेयर में बुधवार को शानदार रैली देखी गई. दलाल स्ट्रीट हरे निशान में ओपन हुआ. शुरुआती बाजार के दौरान मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 800 अंक उछलकर 74,927.94 अंक पर पहुंचा. वहीं, निफ्टी में भी करीब 250 अंकों की तेजी देखने को मिली. मार्केट की शानदार रैली के बीच निवेशकों ने कुछ ही मिनटों में करीब 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली.

शेयर बाजार में मंगलवार के बाद बुधवार को भी शानदार रैली देखने को मिली है. शेयर बाजार की इस तेजी में निवेशकों की संपत्ति कुछ ही मिनटों में 6 लाख करोड़ बढ़ गई, क्योंकि BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के लगभग 423 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 429 लाख करोड़ हो गया.

इन शेयरों में आई सबसे ज्यादा तेजी

सेंसेक्स पर सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वाले शेयरों में Eternal, Bajaj Finance, Mahindra & Mahindra (M&M), UltraTech Cement, Adani Ports और Bajaj Finserv शामिल थे, जिनमें 2-3% की तेजी आई. IT शेयरों जैसे Tech Mahindra, HCLTech और Infosys में गिरावट देखने को मिली वे 3% तक गिर गए.

NSE पर Nifty IT को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. Nifty Realty में करीब 3.5% की उछाल आई और यह बढ़त बनाने में सबसे आगे रहा, जबकि Nifty Consumer Durables, Nifty Metal, Nifty Auto और Nifty Media इसके बाद रहे. NSE पर करीब 2,347 शेयरों में तेज़ी आई, जबकि 217 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और 49 शेयर बिना किसी बदलाव के रहे.

क्यों आई बाजार में तेजी मध्य पूर्व संघर्ष के जल्द खत्म होने के संकेत

अमेरिका और ईरान के बीच अच्छे संकेतों की खबरों ने बाजार में उत्साह बढ़ा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वाशिंगटन डीसी और तेहरान के बीच समझौते के मुख्य मुद्दों पर बात बनी है और उन्होंने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले 5 दिनों के लिए रोकने का आदेश दिया है, जिससे समझौते की उम्मीद बढ़ गई है.

कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से नीचे आईं

मध्य पूर्व के तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रयासों की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 5% से ज्यादा गिर गई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई. भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बीच ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स के जून कॉन्ट्रैक्ट की कीमत गिरकर 93.45 डॉलर हो गई.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपयोग करने वाला देश है, और यह अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 80-90% बाहर से खरीदता है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत के आयात खर्च में बढ़ोतरी, चालू खाते के घाटे में इजाफा, सरकारी बजट के लक्ष्यों पर दबाव, रुपये की कमजोरी, महंगाई बढ़ने और विदेशी निवेश के बाहर जाने का खतरा बढ़ जाता है.

एशियाई बाजारों में तेजी

एशियाई शेयर बाजारों में आज शानदार रैली देखने को मिली. बुधवार सुबह जापान का निक्केई करीब 3% बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 2% ऊपर गया. चीन का ताइवान वेटेड भी करीब 3% उछला. हालांकि, वॉल स्ट्रीट कल के सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ. टेक-हैवी नैस्डैक में करीब 1% की गिरावट आई और S&P 500 लगभग 0.4% नीचे गिरा. यूरोपीय बाजारों का मिला-जुला रुख रहा. UK का FTSE 0.7% से ज्यादा बढ़ा, जबकि फ्रांस का CAC और जर्मनी का DAX लगभग सपाट रहे.

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