मिडिल ईस्ट में तनाव में स्थिरता के संकेत मिलने से बीते दिन यानी 25 मार्च 2026 को क्रूड ऑयल के दामों में गिरावट आई थी. शुरुआती कारोबार में तेल के भाव करीब 6 फीसदी तक नीचे गिर गए थे. मगर आज फिर उनके दामों में तेजी आई है. बीते कुछ हफ्तों में कच्चे तेल के दामों ने काफी झटके दिए हैं. कभी कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचीं, तो बाद में इनमें नरमी भी देखने को मिली. हालांकि, गुरुवार 26 मार्च को एक बार फिर बाजार में तेजी लौट आई हैं. ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया, जबकि WTI यानी कच्चा तेल भी 91 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा रहा है.
इस वजह से तेल की कीमतों में आया उछालगुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बड़ी वजह बना है. अमेरिका जहां लगातार कह रहा है कि सीजफायर को लेकर बातचीत जारी है, वहीं ईरान इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है. साथ ही, ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट पर और कड़ा नियंत्रण करने की बात कर रहा है.
| कमोडिटी | वर्तमान मूल्य | बदलाव (Chg) |
प्रतिशत बदलाव (%Chg) |
| कच्चा तेल | 91.535 | 1.215 | 1.35% |
| ब्रेंट | 103.343 | 1.123 | 1.10% |
| प्राकृतिक गैस | 2.9569 | 0.0049 | 0.17% |
| पेट्रोल (गैसोलीन) | 3.0346 | 0.0222 | 0.74% |
खबरों के मुताबिक, ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर सिक्योरिटी फीस लगाने की योजना बना रहा है. अगर यह फैसला लागू होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा हो सकता है. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी साफ नहीं दिख रहा. एक तरफ वे शांति की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती भी की गई है.
होर्मुज स्ट्रेट में दिक्कत आने से हर दिन होने वाली लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका असर कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतों पर भी पड़ रहा है. ट्रेडर्स का कहना है कि सप्लाई में रुकावट के कारण तेल की कीमतों में कम समय में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. टैंकरों की आवाजाही काफी घट गई है और कड़ी जांच के चलते यह समुद्री रास्ता अब ज्यादा जोखिम भरा हो गया है.
यह भी पढ़ें- आज बंद रहेगा शेयर बाजार, इसलिए नहीं होगी BSE-NSE पर ट्रेडिंग