ड्रोन सुरक्षा के लिए नया टेस्टिंग फ्रेमवर्क तैयार, चीनी पार्ट्स पर कड़ा शिकंजा, जानें सरकार ने क्यों उठाया ये कदम
TV9 Bharatvarsh March 27, 2026 09:42 AM

आधुनिक युद्ध में तेजी से अहम हथियार बनते ड्रोन अब भारतीय सेना के लिए ताकत के साथ-साथ चुनौती भी बन रहे हैं. इसी को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नया टेस्टिंग फ्रेमवर्क तैयार किया है. 34 पेज के इस ड्राफ्ट को मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है. इस फ्रेमवर्क का मकसद सिर्फ ड्रोन की टेस्टिंग करना नहीं, बल्कि ऐसे सुरक्षित ड्रोन तैयार करना है जो हैकिंग, डेटा चोरी और साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित हों.

क्या है नए फ्रेमवर्क में खास?

नए नियमों के तहत ड्रोन के हर अहम पार्ट की पहचान कर उसका अलग-अलग स्तर पर परीक्षण किया जाएगा. इसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों की गहन जांच शामिल होगी.

ड्रोन को खरीद प्रक्रिया में शामिल करने से पहले इन टेस्ट से गुजरना होगा:

  • वल्नरेबिलिटी और पेनिट्रेशन टेस्ट
  • एन्क्रिप्शन और सिक्योर बूट टेस्ट
  • कोड सिग्नेचर और फर्मवेयर वैलिडेशन

इन सभी टेस्ट में पास होने के बाद ही ड्रोन को सेना में शामिल किया जाएगा.

शुरुआत से ही लागू होगा सिस्टम

यह फ्रेमवर्क आरएफआई (सूचना के लिए अनुरोध) चरण से ही लागू किया जाएगा, ताकि कंपनियां शुरुआत से ही सुरक्षित और मानकों के अनुरूप ड्रोन विकसित करें.

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

फ्रेमवर्क में साफ बताया गया है कि दुश्मन ड्रोन के कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट कर सकते हैं, फर्जी कमांड भेज सकते हैं या पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले सकते हैं. इसके अलावा GPS जैमिंग और स्पूफिंग, डेटा चोरी या डेटा में छेड़छाड़ और साइबर टेकओवर जैसे खतरे भी सामने आए हैं.

कौन से पार्ट्स सबसे संवेदनशील?

ड्रोन के कुछ अहम हिस्सों को सबसे ज्यादा जोखिम वाला माना गया है, जैसे:

  • फ्लाइट कंट्रोलर
  • फर्मवेयर
  • GPS/INS सिस्टम
  • सेंसर और कम्युनिकेशन यूनिट
  • ग्राउंड कंट्रोल सॉफ्टवेयर

इनमें किसी एक की भी कमजोरी पूरे सिस्टम को खतरे में डाल सकती है.

चीनी पार्ट्स पर सख्ती

सेना ने पहले ही चीनी पार्ट्स वाले कई ड्रोन कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए हैं. अब कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि उनके ड्रोन में न तो चीनी कंपोनेंट हैं और न ही कोई मैलिशियस कोड. हालांकि, माइक्रोचिप और कम्युनिकेशन उपकरणों का पूरी तरह स्वदेशी उत्पादन अभी संभव नहीं है, इसलिए फिलहाल सर्टिफिकेशन और टेस्टिंग सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है.

किन ड्रोन पर लागू होगा नियम?

फिलहाल यह फ्रेमवर्क छोटे ड्रोन जैसे माइक्रो, मिनी और स्मॉल क्वाडकॉप्टर और हेक्साकॉप्टर
पर लागू होगा. भविष्य में इसे बड़े और एडवांस ड्रोन जैसे MALE और HALE सिस्टम पर भी लागू किया जाएगा.

भारतीय सेना का यह कदम ‘सिक्योर बाय डिजाइन’ रणनीति की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इसका मकसद साफ है स्वदेशी, सुरक्षित और भरोसेमंद ड्रोन तैयार करना, ताकि भविष्य के युद्ध में भारत तकनीकी रूप से मजबूत बना रहे.

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