Raymond के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का निधन, कल मुंबई में होगा अंतिम संस्कार
TV9 Bharatvarsh March 29, 2026 03:42 AM

रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम मुंबई में निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे. विजयपत सिंघानिया के बेटे एवं समूह के वर्तमान अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर उनके निधन की जानकारी साझा की. रेमंड समूह के प्रवक्ता ने बताया कि सिंघानिया का मुंबई में निधन हो गया और उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा.

पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत सिंघानिया एक कुशल पायलट भी थे और उन्होंने हॉट एअर बैलून में सबसे अधिक ऊंचाई हासिल करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने वर्ष 2000 तक रेमंड के चेयरमैन के रूप में दो दशक तक जिम्मेदारी संभाली.

RIP. Om Shanti 🙏 pic.twitter.com/nGtOGAEtHt

— Gautam Singhania (@SinghaniaGautam)

बेटे गौतम से कानूनी विवाद

गौतम को बागडोर सौंपने के बाद विजयपत ने कंपनी में अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे को हस्तांतरित कर दी थी. कुछ साल पहले विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे गौतम के बीच कानूनी विवाद हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने मामले को सुलझा लिया था.

मुंबई में कल अंतिम संस्कार

गौतम सिंघानिया ने अपने पोस्ट में बताया कि कल दोपहर 1:30 बजे मुंबई के रूपारेल मार्ग स्थित हवेली, एलडी में अंतिम संस्कार सभा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद रविवार को दोपहर 3 बजे चंदनवाड़ी में अंतिम संस्कार किया जाएगा.

विजयपत सिंघानिया की उपलब्धियां

विजयपत सिंघानिया रेमंड ग्रुप से अपने लंबे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे, जहां उन्होंने 1980 से 2000 तक अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य कि. उनके नेतृत्व में, कंपनी भारत के अग्रणी कपड़ा और परिधान ब्रांडों में से एक बन गई.व्यापार के अलावा, सिंघानिया विमानन के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं.

हॉट एअर बैलून को उड़ाकर बनाया रिकॉर्ड

2005 में, उन्होंने हॉट एअर बैलून में 21000 मीटर से अधिक की ऊंचाई तक पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया, इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई. उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय हवाई दौड़ भी जीती और भारत में विमानन खेलों के सक्रिय प्रमोटर रहे हैं.

एयर कमोडोर का मिला खिताब

विमानन के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 1994 में भारतीय वायु सेना में मानद एयर कमोडोर का पद प्रदान किया गया. उद्योग और साहसिक खेलों में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण सहित कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं.

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