बीजू पटनायक पर निशिकांत दुबे की टिप्पणी के बाद बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने संसदीय पैनल से दिया इस्तीफा
Samachar Nama Hindi March 30, 2026 03:42 AM

भुवनेश्वर, 29 मार्च (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और आईटी संबंधी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह कदम हाल ही में दुबे द्वारा बीजू पटनायक के खिलाफ कथित तौर पर दिए गए एक अपमानजनक बयान के विरोध में उठाया है।

शनिवार को राज्यसभा के सभापति को लिखे एक पत्र में पात्रा ने पहले लिखा था, "विरोध स्वरूप, और एक सिद्धांत के तौर पर, मैं निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और आईटी पर संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज पर, ऐसे किसी व्यक्ति के अधीन काम जारी नहीं रख सकता, जो स्वर्गीय बीजू पटनायक के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करता हो, जैसा कि उसने आज एक सार्वजनिक बयान में किया।"

बीजद नेता ने राज्यसभा सभापति से यह भी आग्रह किया कि वे उक्त समिति से उनका इस्तीफा स्वीकार करें और इसे लोकसभा अध्यक्ष को भेज दें, क्योंकि यह समिति लोकसभा के अधीन है।

अपने 'एक्स' हैंडल पर पात्रा ने भाजपा नेता के बयान पर गहरा सदमा और दुख व्यक्त किया और इन टिप्पणियों को बीजू पटनायक के खिलाफ किए गए अपमानजनक, झूठे और गैर-जिम्मेदाराना आरोप बताया। बीजू पटनायक एक महान स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी नेता और इस धरती के सपूत थे, जिनका राष्ट्र निर्माण में योगदान निर्विवाद है।

पात्रा ने आगे कहा, "इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने और राजनीतिक स्वार्थ के लिए एक सम्मानित नेता को बदनाम करने के ऐसे प्रयास अस्वीकार्य और निंदनीय हैं।"

ओडिशा के इस महान पूर्व मुख्यमंत्री को एक राष्ट्रीय प्रतीक बताते हुए बीजद नेता ने कहा कि बीजू पटनायक की विरासत हमेशा ओछी राजनीति से कहीं ऊपर रहेगी।

इस बीच, कई अन्य बीजद नेताओं ने भी पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के खिलाफ दुबे द्वारा की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई।

बीजद सांसद सुभाशीष खुंटिया ने कहा, "मैं निशिकांत दुबे द्वारा महान बीजू पटनायक के खिलाफ की गई घोर और अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों की कड़ी निंदा करता हूं। इतिहास की सच्चाई से कोसों दूर, ऐसे बेबुनियाद और सोचे-समझे बिना दिए गए बयान, एक महान स्वतंत्रता सेनानी और ओडिशा के साथ-साथ पूरे राष्ट्र के गौरव और शौर्य के प्रतीक का घोर अपमान हैं।"

बता दें कि 27 मार्च को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए दुबे ने दावा किया था कि जवाहरलाल नेहरू ने 1962 का चीन युद्ध अमेरिकी समर्थन और सीआईए एजेंटों के सहयोग से लड़ा था, जबकि उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे बीजू पटनायक ने अमेरिकी सरकार, सीआई और नेहरू के बीच एक कड़ी (मध्यस्थ) के रूप में काम किया था।

--आईएएनएस

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