मुस्लिम परिवार में शादी, पारसी मूल की थीं जरीन खान—5 महीने बाद बेटे जायद खान ने बताया क्यों हुआ हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार
Lifeberrys Hindi March 30, 2026 04:42 PM

दिवंगत अभिनेत्री जरीन खान के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर उठी बहस पर अब उनके बेटे जायद खान ने खुलकर अपनी बात रखी है। 81 वर्ष की आयु में मुंबई में दुनिया को अलविदा कहने वाली जरीन खान के अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किए गए थे, जिसने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल भी उठाए, लेकिन अब जायद ने इस पूरे मामले के पीछे की असल वजह साझा की है।

जायद खान ने एक इंटरव्यू में भावुक होते हुए बताया कि यह निर्णय किसी दबाव या परंपरा के कारण नहीं, बल्कि उनकी मां की आखिरी इच्छा का सम्मान करने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी मां चाहती थीं कि उनके निधन के बाद उनकी अस्थियां पवित्र गंगा में प्रवाहित की जाएं, ताकि उन्हें आत्मिक शांति और मुक्ति मिल सके। बेटे के रूप में उन्होंने सिर्फ वही किया जो उनकी मां चाहती थीं।

ट्रोलिंग पर जायद का स्पष्ट जवाब

सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करने को लेकर जायद ने बेबाकी से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में सबसे ऊपर “इंसानियत” को रखा जाता है, न कि किसी एक धर्म को। उनके मुताबिक, उनका परिवार विभिन्न संस्कृतियों और मान्यताओं का सम्मान करता है। घर में काम करने वाले लोग भी अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं, और परिवार यह सुनिश्चित करता है कि सभी को बराबरी का सम्मान और अवसर मिले।

जायद ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म उनके लिए एक निजी विषय है, जिसे किसी पर थोपना या उसकी तुलना करना गलत है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अपने विश्वास के अनुसार जीने का अधिकार है और दूसरों को उस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने खुद को एक धर्मनिरपेक्ष परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उन्हें अपनी सोच को साबित करने की जरूरत नहीं है।

मां की आखिरी इच्छा बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता

जायद ने अपनी मां से जुड़ी एक भावुक याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी मां नदी किनारे बैठी थीं, तभी उनके मन में यह विचार आया कि मृत्यु के बाद उनकी अस्थियां नदी में बहा दी जाएं। वह खुद को पूरी तरह मुक्त करना चाहती थीं। जायद ने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनके लिए सबसे अहम यही था कि वह अपनी मां की इस अंतिम इच्छा को पूरा करें, चाहे लोग कुछ भी कहें।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज में मौजूद कट्टर सोच और नफरत को बदलने में समय लगेगा, लेकिन वह किसी को दोष नहीं देते। उनके अनुसार, परिस्थितियां ही कई बार लोगों की सोच को सीमित कर देती हैं।

जरीन खान की जिंदगी और अंतिम विदाई

गौरतलब है कि 7 नवंबर 2025 को जरीन खान का मुंबई में निधन हुआ था। वह मूल रूप से पारसी परिवार से थीं और उनकी शादी एक मुस्लिम परिवार में हुई थी। ऐसे में उनके अंतिम संस्कार को लेकर लोगों के बीच जिज्ञासा और बहस होना स्वाभाविक था।

हालांकि, जायद खान ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया कि उनकी मां की इच्छाओं का सम्मान करना ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म था। परिवार ने पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया और बाद में उनकी अस्थियों का विसर्जन गंगा में किया, जैसा कि जरीन खान चाहती थीं।

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.