बिना कोचिंग अयोध्या की बेटी का कमाल, UPPSC में चौथा स्थान पाकर बनी डिप्टी कलेक्टर
शिवेंद्र द्विवेदी, अयोध्या March 31, 2026 07:12 AM

अयोध्या की इस बेटी की सफलता सिर्फ एक रिजल्ट नहीं, बल्कि मेहनत, संघर्ष और परिवार के भरोसे की कहानी है.अनामिका मिश्रा ने बिना किसी कोचिंग के, सीमित साधनों में रहकर UPPSC में चौथा स्थान हासिल किया और डिप्टी कलेक्टर बनकर अपने माता-पिता के सपनों को सच कर दिखाया. उनकी यह उपलब्धि आज हर उस घर की उम्मीद बन गई है, खास बात यह है कि उन्होंने बिना कोचिंग के घर पर रहकर तैयारी की और आज डिप्टी कलेक्टर बन गयीं.

बिना कोचिंग हासिल की बड़ी सफलता

अनामिका मिश्रा की सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि खुद से पढ़ाई करके यह मुकाम हासिल किया. उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए इंटरनेट का सहारा लिया और लगातार मेहनत करती रहीं. उनकी यही लगन आज उन्हें इस ऊंचाई तक लेकर आई है.

परिवार का मिला पूरा साथ
अनामिका की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है. उनके पिता महेंद्र नाथ मिश्रा रेलवे में स्टेशन अधीक्षक हैं. उन्होंने बेटी की पढ़ाई में हर संभव मदद की. वे अक्सर इंटरनेट से नोट्स और स्टडी मटेरियल डाउनलोड करके अनामिका को देते थे, जिससे उनकी तैयारी मजबूत होती गई. पिता महेंद्र नाथ मिश्रा ने कहा “हम बस इतना करते थे कि उसे पढ़ाई का सही मटेरियल मिल जाए. बाकी मेहनत तो अनामिका ने खुद की है. आज उसने जो हासिल किया है, उस पर हमें बहुत गर्व है”

पति ने बताया मेहनत का फल
अनामिका की शादी तीन साल पहले आकाश पांडे से हुई थी. उनके पति ने भी उनकी सफलता पर खुशी जताई और कहा कि यह सब उनकी मेहनत का नतीजा है. पति आकाश पांडे ने कहा“अनामिका ने बहुत मेहनत की है. उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की और कभी हार नहीं मानी. आज जो सफलता उन्हें मिली है, वह पूरी तरह से उनकी लगन और मेहनत का फल है”

रात 12 बजे मिली खुशखबरी
अनामिका ने बताया कि उन्हें देर रात करीब 12 बजे अपने रिजल्ट के बारे में पता चला. जैसे ही उन्होंने देखा कि उनका चौथा स्थान आया है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. इस खुशी के कारण वह पूरी रात सो नहीं पायीं. अनामिका मिश्रा ने कहा “रात में रिजल्ट देखा तो यकीन ही नहीं हुआ, चौथा स्थान मिला, यह जानकर बहुत खुशी हुई.मैंने घर पर रहकर ही तैयारी की और परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया”

दूसरों के लिए बनीं मिसाल

अनामिका की कहानी यह बताती है कि अगर इंसान में कुछ करने का जज्बा हो तो वह किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल कर सकता है. बिना कोचिंग के इस तरह की सफलता पाना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया.आज अनामिका मिश्रा न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे अयोध्या और प्रदेश के लिए गर्व का कारण बन गई हैं. उनकी सफलता से कई युवाओं को प्रेरणा मिलेगी कि वे भी अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं.

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