अब बिना बताए नहीं होगी लव मैरिज! शादी के नियम बदले, परिवार को मिलेगी सूचना'
Newshimachali Hindi April 01, 2026 05:42 AM

गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में प्रस्तावित संशोधन इन दिनों राज्य की राजनीति और समाज दोनों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 20 फरवरी को गुजरात विधानसभा में उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने गुजरात मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट के नियमों में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया। सरकार का तर्क है कि हाल के वर्षों में अंतर-धार्मिक विवाहों और पहचान छिपाकर की गई शादियों से जुड़े कई विवादित मामले सामने आए हैं, जिनमें युवतियों के साथ धोखाधड़ी और शोषण के आरोप लगे।

सरकार के अनुसार, गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में यह बदलाव सामाजिक पारदर्शिता बढ़ाने और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे निजता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल भी उठाए हैं।

माता-पिता को सूचना देना क्यों बनाया गया अनिवार्य?

घोषणा-पत्र का नया प्रावधान

नए प्रस्ताव के तहत गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि शादी का पंजीकरण कराते समय दूल्हा-दुल्हन को एक घोषणा-पत्र देना होगा। इस घोषणा-पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने अपने माता-पिता को विवाह की जानकारी दी है या नहीं।

इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों के माता-पिता का नाम, पता, आधार नंबर और मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे परिवारों को समय रहते जानकारी मिल सकेगी और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा।

असिस्टेंट रजिस्ट्रार की भूमिका

गुजरात विवाह पंजीकरण नियम के संशोधित प्रस्ताव के अनुसार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार आवेदन की जांच करेगा और 10 कार्य दिवस के भीतर माता-पिता को व्हाट्सएप, ईमेल या अन्य डिजिटल माध्यम से सूचना भेजेगा। यदि इस दौरान किसी प्रकार की आपत्ति सामने आती है, तो उस पर जांच की जाएगी।

विवाह प्रमाण-पत्र मिलने में देरी क्यों?

30 से 40 दिन की नई समयसीमा

अब तक जहां विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत जल्दी पूरी हो जाती थी, वहीं गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में प्रस्तावित बदलाव के बाद विवाह प्रमाण-पत्र मिलने में 30 से 40 दिन तक का समय लग सकता है। सरकार का कहना है कि यह देरी सुरक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

इस दौरान सभी दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। यदि कोई आपत्ति दर्ज होती है, तो उसका निपटारा किए बिना प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाएगा।

ऑनलाइन पोर्टल और दस्तावेज अपलोड

संशोधित गुजरात विवाह पंजीकरण नियम के तहत सभी दस्तावेज एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। सरकार इसके लिए अलग से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है। गवाहों की फोटो और आधार कार्ड भी अनिवार्य किए जाएंगे, ताकि फर्जीवाड़े की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके।

सरकार का पक्ष: सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था

हर्ष सांघवी का बयान

विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में यह संशोधन बेटियों की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां युवतियों को पहचान छिपाकर बहला-फुसलाकर शादी की गई और बाद में उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाया गया।

सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।

विपक्ष और सामाजिक संगठनों की आपत्तियां

निजता बनाम सुरक्षा की बहस

हालांकि गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में प्रस्तावित बदलावों को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि बालिग व्यक्तियों के विवाह में माता-पिता को अनिवार्य रूप से सूचना देना निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। वे सुझाव दे रहे हैं कि नियमों को लागू करते समय व्यक्तिगत अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

30 दिन तक मांगे जाएंगे जनता के सुझाव

अंतिम निर्णय से पहले सार्वजनिक राय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में यह संशोधन फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे अगले 30 दिनों तक जनता के सुझाव और आपत्तियों के लिए खुला रखा जाएगा। इसके बाद सभी प्रतिक्रियाओं पर विचार कर अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।

यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक पारदर्शिता को दर्शाती है और सरकार का दावा है कि वह सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लेगी।

महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा असर?

अन्य राज्यों में उठ रही मांग

गुजरात के इस कदम के बाद महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के नियम लागू करने की मांग उठने लगी है। कई संगठनों ने वहां की सरकारों से अपील की है कि युवतियों की सुरक्षा के लिए गुजरात विवाह पंजीकरण नियम जैसे सख्त प्रावधान किए जाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में अन्य राज्य भी इसी दिशा में कदम उठा सकते हैं।

बदलाव जरूरी या विवादित?

कुल मिलाकर, गुजरात विवाह पंजीकरण नियम में प्रस्तावित बदलाव एक ओर जहां सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर नई बहस भी छेड़ते हैं। आने वाले 30 दिन यह तय करेंगे कि जनता और विशेषज्ञ इस प्रस्ताव को किस रूप में स्वीकार करते हैं।

यह साफ है कि विवाह जैसे संवेदनशील सामाजिक विषय पर कोई भी कानूनी बदलाव व्यापक संवाद और संतुलित दृष्टिकोण के बिना सफल नहीं हो सकता।

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